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Census 2026: जनगणना के लिए किसी भी दस्तावेज की जरूरत नहीं, सिर्फ सही जानकारी दें, आज से घर-घर पहुंचेगी टीम

Census 2026:जनगणना राज्य की विकास योजनाओं के लिए आधार बनेगी। उन्होंने स्व-गणना की स्थिति, प्रगणकों की भूमिका, डेटा सुरक्षा और नागरिकों की भागीदारी से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

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Census 2026: जनगणना के लिए किसी भी दस्तावेज की जरूरत नहीं, सिर्फ सही जानकारी दें, आज से घर-घर पहुंचेगी टीम

आज से जनगणना के घर-घर पहुंचेगी टीम (Photo AI)

Census 2026: छत्तीसगढ़ में जनगणना 2026 नई डिजिटल व्यवस्था के साथ शुरू हो चुकी है, जिसमें स्व-गणना और प्रगणकों के जरिए डेटा संग्रहण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाने पर खास जोर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के जनगणना अधिकारी कार्तिकेय गोयल ने बताया कि यह जनगणना राज्य की विकास योजनाओं के लिए आधार बनेगी। उन्होंने स्व-गणना की स्थिति, प्रगणकों की भूमिका, डेटा सुरक्षा और नागरिकों की भागीदारी से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश

प्रश्न : स्व-गणना की स्थिति क्या है?
जवाब : 30 अप्रैल शाम 6 बजे तक 132195 परिवारों ने स्व-गणना की है जो 2011 के आधार पर 2.34 प्रतिशत है। जिन परिवारों ने स्व-गणना की है, उन्हें 1 से 30 मई के बीच प्रगणक के आने पर अपनी एसईआईडी साझा करनी होगी। यदि एसईआईडी मैच हो जाती है, तो प्रगणक जानकारी की पुष्टि कर सबमिट करेगा, अन्यथा 33 प्रश्नों की जानकारी फिर से दर्ज की जाएगी।

प्रश्न :1 मई से प्रगणक घर-घर जाएंगे, लोगों को क्या तैयार रखना चाहिए?

जवाब : जनगणना में किसी भी प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती। उत्तरदाता को केवल अपने सर्वोत्तम ज्ञान के आधार पर सही जानकारी देनी होती है।
प्रश्न : प्रगणक किन सवालों की जानकारी लेंगे? क्या जाति से जुड़े सवाल होंगे?
जवाब : प्रगणक मकान की स्थिति, परिवार के सदस्यों, सुविधाओं (पेयजल, बिजली, शौचालय, ईंधन), संपत्तियों (टीवी, मोबाइल, इंटरनेट) और एक मोबाइल नंबर जैसी कुल 33 जानकारियां दर्ज करेंगे। पहले चरण में केवल यह पूछा जाएगा कि परिवार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणी से संबंधित है।

प्रश्न : स्व-गणना न करने पर क्या दंड है?

जवाब: स्व-गणना पूरी तरह ऐच्छिक थी। यदि किसी ने नहीं किया, तो भी प्रगणक घर आकर जानकारी लेगा। कोई पेनल्टी या शुल्क नहीं है।
प्रश्न : डिजिटल जनगणना में डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित है?
जवाब : जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी गोपनीय रहती है। डेटा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है और इसे किसी भी जांच, टैक्स या आरटीआई में उपयोग नहीं किया जा सकता।

प्रश्न : छत्तीसगढ़ में कितने प्रगणक तैनात हैं? क्या उन्हें प्रशिक्षण मिला है?

जवाब : प्रदेश में लगभग 51300 प्रगणक (10 प्रतिशत रिजर्व सहित) तैनात किए गए हैं। सभी को 3 दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है और पूरे राज्य में समान व्यवस्था लागू है।
प्रश्न : स्व-गणना और प्रगणक के डेटा में अंतर होगा?
जवाब : कोई अंतर नहीं होगा, क्योंकि प्रगणक वही जानकारी दर्ज करेगा जो परिवार द्वारा दी जाएगी।

प्रश्न : स्व-गणना के बाद प्रगणक क्या करेंगे?

जवाब : वे केवल जानकारी की पुष्टि कर सबमिट करेंगे। यदि कोई त्रुटि होगी, तो उसे सुधारने का विकल्प रहेगा।
प्रश्न : इस जनगणना से राज्य को क्या लाभ मिलेगा?
जवाब : जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और रोजगार जैसी योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जाएगी।

प्रश्न : इस बार क्या नई विशेषताएं हैं?

जवाब : यह पहली डिजिटल जनगणना है, जिसमें मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संग्रह होगा। दोनों चरणों में स्व-गणना का विकल्प रहेगा और दूसरे चरण में जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे।