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वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की CAG रिपोर्ट, बिना ग्राम सभा मंजूरी करोड़ों के काम उजागर

Chhattisgarh Assembly News: छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने CAG की चार रिपोर्ट पेश कीं। रिपोर्ट में मनरेगा, DMF फंड, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना और राज्य के वित्तीय प्रबंधन में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
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OP Choudhary CAG Report

मनरेगा-डीएमएफ में अनियमितताओं का खुलासा (photo source- Patrika)

OP Choudhary CAG Report: विस में मंगलवार को सरकार के वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन के पटल पर कैग की चार रिपोर्ट प्रस्तुत कीं, जिनमें जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ), प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना, मनरेगा और राज्य की वित्तीय स्थिति से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार डीएमएफ निधि का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत किया गया।

कई जिलों में बिना वार्षिक कार्ययोजना और बजट तैयार किए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। वहीं मनरेगा में ग्राम सभाओं की मंजूरी के बिना बड़ी संख्या में कार्य शुरू कराए गए तथा मजदूरों के ईपीएफ अंशदान के भुगतान में अनियमितताएं सामने आईं। राज्य वित्त पर आधारित रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई नई योजनाओं के लिए बजट तो स्वीकृत हुआ, लेकिन पूरे वित्तीय वर्ष में उन पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया। दूसरी ओर, राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत भी मिले हैं और जीएसडीपी तथा राजस्व प्राप्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

District Mineral Foundation Chhattisgarh: 261.41 करोड़ का प्रावधान कागजों तक सीमित

कैग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने 25 नई योजनाओं के लिए 261.41 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया था, लेकिन पूरे वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं पर कोई खर्च नहीं किया गया। परिणामस्वरूप सभी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रहीं और उनका क्रियान्वयन शुरू ही नहीं हो सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि में कमी दर्ज की गई।

वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान ब्याज, वेतन और पेंशन पर कुल राजस्व व्यय का 39 से 50 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ। वर्ष 2024-25 में सरकार द्वारा लिए गए कुल ऋण का 47 प्रतिशत हिस्सा पुराने कर्ज के भुगतान में उपयोग किया गया। राज्य का कुल बजट 1.88 लाख करोड़ रुपए था, जबकि वास्तविक व्यय केवल 1.59 लाख करोड़ रुपए ही हो पाया। इससे विभिन्न अनुदानों में 28,759.93 करोड़ रुपए अर्थात 15.26 प्रतिशत राशि बची रह गई।

जीएसडीपी में 10.89 प्रतिशत की बढ़ोतरी

कैग रिपोर्ट में राज्य की आर्थिक स्थिति के कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। वर्ष 2020-21 में 3.52 लाख करोड़ रुपए रही सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024-25 में बढ़कर 5.67 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई। वर्ष 2023-24 की तुलना में जीएसडीपी में 10.89 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में राजस्व प्राप्तियों में 16.21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और जीएसडीपी के अनुपात में राजस्व प्राप्तियां 20.21 प्रतिशत से बढ़कर 21.18 प्रतिशत हो गईं।

डीएमएफ निधि के उपयोग में नियमों की अनदेखी

कैग ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में बिना वार्षिक कार्ययोजना और बजट स्वीकृत किए डीएमएफ निधि खर्च की गई। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के निर्धारित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से हटकर विभिन्न सरकारी कार्यालयों के निर्माण, नवीनीकरण, सौंदर्यीकरण तथा अन्य खरीदी कार्यों पर 30.73 करोड़ रुपए खर्च किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्याप्त योजना, निगरानी और तकनीकी परीक्षण के अभाव में कला एवं संस्कृति केंद्र, बायोगैस आधारित विद्युत उत्पादन संयंत्र, मुर्गी पालन और मशरूम उत्पादन केंद्र जैसी परियोजनाएं अधूरी रह गईं। इन अधूरी परियोजनाओं और अनुपयोगी परिसंपत्तियों पर 41.80 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।

भंडार क्रय नियमों का भी उल्लंघन

डीएमएफ निधि से खरीदी में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। कैग के अनुसार कार्यान्वयन एजेंसियों ने खुली निविदा आमंत्रित किए बिना सीमित निविदा के आधार पर 17.49 करोड़ रुपए की खरीदी की। वहीं तकनीकी विनिर्देश तय किए बिना 38.82 करोड़ रुपए की वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद की गई। इसके अलावा भारत सरकार के जुलाई 2021 के निर्देशों के विपरीत डीएमएफ निधि से राज्य स्तरीय जिला खनिज संस्थान प्रकोष्ठ को 1.68 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए गए।

MGNREGA Irregularities Chhattisgarh: ईपीएफ की 29.62 करोड़ राशि जमा नहीं, 84.59 करोड़ की देनदारी

मनरेगा की कार्यप्रणाली पर कैग की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार श्रम बजट तैयार करने से पहले परिवारों का सर्वेक्षण नहीं किया गया और ग्राम सभाओं की अनिवार्य स्वीकृति के बिना बड़ी संख्या में कार्य प्रारंभ कर दिए गए। नमूना जांच में शामिल 48 ग्राम पंचायतों में लगभग 86 प्रतिशत कार्य ग्राम सभा की मंजूरी के बिना कराए गए। इसके अलावा उपलब्ध राशि होने के बावजूद मजदूरी भुगतान में विलंब किया गया। अप्रैल 2015 से मार्च 2023 के बीच कर्मचारियों के भविष्य निधि (ईपीएफ) का 29.62 करोड़ रुपए अंशदान जमा नहीं किया गया, जिसके कारण दंड और ब्याज सहित 84.59 करोड़ रुपए की देनदारी बन गई।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ी, लेकिन 100 दिन रोजगार नहीं मिला

रिपोर्ट के अनुसार चयनित जिलों में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 43 से 59 प्रतिशत के बीच रही, जो अधिनियम में निर्धारित न्यूनतम 33 प्रतिशत से अधिक है। हालांकि रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में स्थिति संतोषजनक नहीं रही। 134.10 लाख परिवारों में से 111.31 लाख परिवारों (83 प्रतिशत) को 100 दिनों से कम रोजगार मिला। केवल 1.23 लाख परिवार (0.92 प्रतिशत) ही पूरे 100 दिन का रोजगार प्राप्त कर सके, जबकि 21.56 लाख परिवारों (16 प्रतिशत) को 100 दिनों से अधिक रोजगार मिला। कैग ने इसे रोजगार वितरण में असंतुलन का संकेत माना है।