CG News: इन दिनों बच्चों में गेमिंग एडिक्शन तेजी से बढ़ रहा है और हाल ही में गाजियाबाद में तीन बहनों की खुदकुशी ने इसे गंभीर सामाजिक बहस के केंद्र में ला दिया है। इसी संदर्भ में पत्रिका ऑफिस में पेरेंट्स के लिए एक टॉक शो आयोजित किया गया, जिसका विषय था गेमिंग की गिरफ्त में बचपन, जिम्मेदारी किसकी? टॉक शो को पत्रिका के स्टेट एडिटर गोविंद ठाकरे ने होस्ट किया। इस मौके पर स्थानीय संपादक देवेंद्र गोस्वामी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले पत्रिका की अब तक की यात्रा को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
भारतीय स्त्री शक्ति की प्रांच सचिव भारवि वैष्णव ने कहा कि जैसे सेहत और धर्म के लिए व्रत रखते हैं, वैसे ही मोबाइल व्रत भी जरूरी है। इसकी शुरुआत अगर बड़े करेंगे तो बच्चे भी उसका अनुसरण करेंगे। बच्चों की काउंसिलिंग और संस्कार जरूरी हैं। स्कूल में एंट्री से पहले मोबाइल जमा कराना चाहिए।
हौम्योपैथी स्पेशलिस्ट नीता शर्मा ने कहा कि गेमिंग की लत के कारण बच्चे देर रात तक जाग रहे हैं, जिससे कई बीमारियां हो रही हैं। उन्होंने रात 9 बजे के बाद मोबाइल लॉकडाउन की जरूरत बताई और स्कूलों में न्यूज पेपर पढ़ने की आदत डालने पर जोर दिया।