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मोबाइल टावर ने बढ़ाई मुसीबत, 24 घंटे किर्र-किर्र की आवाज से लोगों का हुआ बुरा हाल

Chhattisgarh News: रायपुर में मकान की छत पर टावर से निकलने वाले रेडिएशन से एक पूरी रेसीडेंसी सोसायटी खतरे में घिर गई है। टू जी से 5 जी में तब्दील हो चुके इस टावर से 24 घंटे किर-किर की तेज आवाज की वजह से जहां आसपास के लोगों की नींद गायब हो गई हैं। वहीं डर के मारे में लोग छतों पर जाना बंद कर चुके हैं।

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Raipur news रायपुर में मकान की छत पर टावर से निकलने वाले रेडिएशन से एक पूरी रेसीडेंसी सोसायटी खतरे में घिर गई है। टू जी से 5 जी में तब्दील हो चुके इस टावर से 24 घंटे किर-किर की तेज आवाज की वजह से जहां आसपास के लोगों की नींद गायब हो गई हैं। वहीं डर के मारे में लोग छतों पर जाना बंद कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि वे कई सालों से परेशान हैं, सांस एवं अन्य बीमारियों से पीडि़त सदस्यों का घर में रहना अब मुश्किल हो गया है। हैरानी ये कि सोसायटी के लोगों के भारी आक्रोश के बाद रायपुर विकास प्राधिकरण ने नोटिस कई बार जारी किया, परंतु उस पर अमल नहीं सका।

रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने कटोरातालाब आवासीय योजना के तहत राजधानी के न्यू राजेंद्रनगर में भूखंड बेचा। आरडीए की इसी कॉलोनी के आशियाना रेंसीडेंसी सोसायटी में 50 से ज्यादा परिवार रहते हैं। उन्हीं में से एक व्यक्ति द्वारा अपने मकान की छत को टावर लगाने के लिए किराए में दे रखा है। सोसायटी में जब बसाहट कम थी, तब टू जी रेंज का टावर था, परंतु अब घनी आबादी के बीच इस टावर को अपग्रेड करके कंपनी द्वारा 5जी में तब्दील किया जा चुका है। इससे मुश्किल और बढ़ गई है। सोसायटी के लोगों का कहना है कि जब से टावर अपग्रेड हुआ है तब से स्व. जगजीत सिंह चौधरी का परिवार शहर के दूसरे क्षेत्र में शिफ्ट हो गया है। महीने में एक बार किराया लेने ही आते हैं। जबकि पूरी सोसायटी के लोग पिछले सात-आठ सालों से परेशानी से घिरे हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए आरडीए के जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार फरियाद किए तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस तो जारी किया गया, लेकिन आज तक एग्रीमेंट के दस्तावेजों की जांच तक नहीं की गई।

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कई लोग बीमारियों से घिरे, आज सीईओ को घेरेंगे

आशियाना रेसीडेंसी सोसायटी के अध्यक्ष अध्यक्ष किशोर मोटवानी और उपाध्यक्ष भीष्म चिमनानी ने आरडीए को सौंपे शिकायत पत्र में कहा है कि इस टॉवर की रेडिएशन ध्वनि लगातार घरों में गूंज रही है। इससे पूरे सोसायटी के लोग परेशान हैं। हैरानी ये कि हानिकारक रेडिएशन और ध्वनि प्रदूषण नियम है। इसके तहत एक दंडनीय अपराध माना गया है। लेकिन, जिम्मेदारों की मिलीभगत की वजह से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि सोसायटी के लोग यह अवगत करा चुके हैं कि कई सदस्य स्वास्थ्य खराब होने से पीडि़त हैं। जैसे बहरापन, कैंसर, जोड़ों में दर्द, सांस के मरीज हैं जो सन..सन.. और किर-किर की तेज आवास से रात में सो नहीं पाते हैं। इस समस्या को लेकर सोमवार को आरडीए के सीईओ को घेरने का ऐलान किया है।

टावर के पास कई बार कबूतर मरे मिले

डॉ. नवीन खूबचंदानी ने बताया कि 5जी टॉवर में पांच बड़ी-बड़ी बैटरी लगाई है। आसपास पंछियों का भी आना कम हो गया है और छत पर कई बार कबूतर मरे हुए दिखे। इस टावर के बाजू में उनका मकान है और पिताजी बीमार रहते हैं। ऐसे में जब उन्होंने ध्वनि की तीव्रता नापा गया तो पता चला कि यह 75 डेसीबल तक है। तेज ध्वनि गूंजते रहने से उन्हें रात में नींद नहीं आती है। घर के लोग छत पर जाने में घबराते हैं।

एक्सपर्ट व्यू

5 साल की सजा और 1 लाख तक जुर्माना का प्रावधान
पर्यावरण संरक्षण नियम के अनुसार व्यावसायिक क्षेत्र में 65 डीबी से 55 डीबी तय है। जबकि आवासीय क्षेत्रों में यह दिन और रात 55 से 45 डीबी निधाZरित है। इसका उल्लंघन अपराध है, जिसमें 5 साल तक की सजा और 1 लाख रुपए तक जुर्माना या फिर दोनों सजा होने का प्रावधान है।
डॉ. शम्स परवेज, पर्यावरणविद्, रविवि

वर्जन
योजना के तहत आवंटित भूखंड की छत पर टावर के रेडिएशन से परेशान लोगों की शिकायत पर विभागीय नोटिस संबंधित व्यक्ति को जारी किया गया है। टावर हटाने के लिए नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ निगम प्रशासन को भी पत्र भेजा जाएगा।
शम्मी नाहिद, सीईओ, आरडीए

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