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5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों की याचिका खारिज, जानें मामला…

5th-8th Board Exam: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (photo source- Patrika)

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (photo source- Patrika)

5th-8th Board Exam: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा दायर की गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में परीक्षा का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग ही करेगा। इस निर्णय के बाद राज्य के लगभग 6200 निजी स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की एक समान बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी। साथ ही, इस परीक्षा में पास और फेल की व्यवस्था भी लागू रहेगी।

5th-8th Board Exam: कई स्कूलों ने इनका वितरण नहीं…

निजी स्कूल संगठन ने आरटीई अधिनियम की धारा 16 और 30 का हवाला देते हुए बोर्ड परीक्षा का विरोध किया था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2024 को आरटीई कानून में संशोधन किया है। नए प्रावधान के अनुसार, कक्षा 5वीं और 8वीं में वार्षिक परीक्षा अनिवार्य होगी और यदि कोई छात्र असफल होता है, तो उसे उसी कक्षा में रोका जा सकेगा।

इस मामले में विकास तिवारी ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं और अभिभावकों से महंगी किताबों के नाम पर अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीजी बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के छात्रों को राज्य सरकार द्वारा मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जानी चाहिए, लेकिन कई स्कूलों ने इनका वितरण नहीं किया।

5th-8th Board Exam: 1 से 10 तक मुफ्त किताबों का लाभ सुनिश्चित

आरटीई के तहत अध्ययनरत गरीब विद्यार्थियों को भी निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी ने निजी स्कूल संगठन की याचिका निरस्त कर दी।

अदालत ने माना कि संशोधित आरटीई कानून के तहत बोर्ड परीक्षा आयोजित करना पूरी तरह कानूनी है। विकास तिवारी ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे फर्जी सीबीएसई स्कूलों पर अंकुश लगेगा, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और आरटीई के अंतर्गत पढ़ने वाले छात्रों को कक्षा 1 से 10 तक मुफ्त किताबों का लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।

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