
दाल, तेल और डिटर्जेंट सब महंगा! मिडिल ईस्ट संकट का असर, आम आदमी की जेब पर बड़ा झटका...(photo-AI
Middle East Crisis Impact in CG: छत्तीसगढ़ के रायपुर में रोजमर्रा की जरूरतों पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इसका सीधा असर किचन से लेकर घरेलू इस्तेमाल की चीजों तक दिखने लगा है। किराना स्टोर संचालक जयेश लोटिया के मुताबिक, बीते दिनों में सभी दालों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
उन्होंने बताया कि यह महंगाई सिर्फ दालों तक सीमित नहीं है। वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट साबुन, पॉलिथीन और प्लास्टिक से जुड़े सभी सामानों के दाम भी बढ़ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह पेट्रो केमिकल्स की कमी है, जिनका आयात मीडिल-ईस्ट जंग के कारण प्रभावित हुआ है। व्यापारियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
विदेशों से आयातित सोयाबीन तेल की कीमतों में आई तेजी अब घरेलू बाजार में साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सोयाबीन तेल महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर देश के खाने के तेल बाजार पर पड़ा है। इसके चलते सरसों, रिफाइंड और अन्य खाद्य तेलों के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
व्यापारियों के अनुसार, बीते कुछ दिनों में तेल के भाव प्रति टिन 75 रुपए से लेकर 300 रुपए तक बढ़ चुके हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। महंगाई का असर सिर्फ खाद्य तेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा अब घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुओं तक भी फैल गया है।
कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन लागत बढ़ी
दरअसल, पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति में आई कमी ने कई उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ा दी है। डिटर्जेंट, साबुन, प्लास्टिक और पॉलिथीन जैसे उत्पादों के निर्माण में इन कच्चे माल का व्यापक उपयोग होता है। जब इनकी कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई बाधित होती है, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के चलते यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर हालात जल्द सामान्य नहीं होते, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इससे न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि घरेलू बजट को संतुलित करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
Published on:
07 Apr 2026 11:23 am
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