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छत्तीसगढ़ के जंगल सफारी को ज्यादा आकर्षक बनाने मैसूर के जू से आएंगे अजगर

छत्तीसगढ़ में जंगल सफारी को और भी आकर्षक बनाने के लिए यहां जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां दूसरे राज्यों से जल्द ही कुछ नए वन्य जीवों को लाने की योजना बनाई जा रही है।

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छत्तीसगढ़ के जंगल सफारी को ज्यादा आकर्षक बनाने मैसूर के जू से आएंगे अजगर

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नया रायपुर स्थित जंगल सफारी (Jungle safari) में जल्द ही मैसूर से Python, भेडिय़ा, गौर और ग्वालियर से घडिय़ाल सहित कुछ अन्य वन्य जीवों को लाया जाएगा। इसके लिए कर्नाटक (Karnataka) और मध्यप्रदेश के वन विभाग (Forest department) से चर्चा चल रही है। इन्हे अक्टूबर में लाए जाने की तैयारी चल रही है। इसकी अनुमति के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया को मुख्यालय द्वारा पत्र लिखा गया है। साथ ही दोनों ही राज्यों के बीच आपसी सहमति से वन्य जीव की शिफ्टिंग का हवाला दिया गया है।

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बताया जाता है कि उन्हे रखने के लिए 10 नए इनक्लोजर भी बनाए जा रहे हैं। इसका निर्माण महीने भर में पूरा करने की योजना बनाई गई है। बता दें कि महीनेभर पहले मध्यप्रदेश और मैसूर जू अथॉरिटी के अफसर जंगल सफारी देखने के लिए आए थे। इस दौरान उन्होने बहुतायत में पाए जाने वाले वन्य जीवों के अदला बदली के संबंध में चर्चा की गई थी। इस दौरान सहमति बनने के बाद उनके बीच अनुबंध भी किया गया था।

कर्नाटक के मैसूर स्थित जू से लाए जाने वाले अजगर, भेडिय़ा और गौर के बदले एक टाइगर, लकड़बग्घा और लोमड़ी दिया जाएगा। इसी तरह ग्वालियर जू को घडिय़ाल और कुछ अन्य वन्य जीवों के बदले नर और मादा तेंदुआ देने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि इसे अंतिम रूप देने के लिए जल्दी वन विभाग की एक टीम दोनों ही राज्यों का दौरा करेगी। बता दें कि इसके पहले जंगली हाथियों के उपद्रव को रोकने के लिए कर्नाटक से प्रशिक्षित कुमकी हाथी लाए गए हैं।

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वन विभाग के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वन्य जीवों को रखने के लिए 8 इन्क्लोजर का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए 12 करोड़ रूपए राज्य सरकार से मिल चुके हैं। बताया जा रहा है कि कुल 17 इनक्लोजर बनाए जाने हैं। इसका निर्माण कार्य पूरा होते ही वन्य जीवों को लाया जाएगा।

पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि जंगल सफारी को और बेहतर और दर्शनीय बनाने के लिए अन्य राज्यों से वन्य जीवों को लाया जाएगा। इसके लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया करे स्वीकृति के लिए पत्र लिखा गया है। साथ ही उन्हे रखने के लिए बाड़े भी बनाए जा रहे हैं।