
Raipur News: एक प्रॉपर्टी की तीन बार रजिस्ट्री, बिना जांच नामांतरण भी तीन बार
रायपुरा के अग्रोहा सोसायटी स्थित करोड़ों की संपत्ति की तीन बार रजिस्ट्री के मामले में उपपंजीयक को सस्पेंड कर दिया गया है। तत्कालीन मुख्य पंजीयक को नोटिस जारी किया गया है। उपपंजीयक ने एक ही जमीन की तीन रजिस्ट्री करके बड़ा गोलमाल किया है।
पत्रिका ने 28 फरवरी को एक प्लॉट की तीन रजिस्ट्री की खबर प्रकाशित की थी। मामले में जांच शुरू की गई। इसके बाद डिप्टी रजिस्ट्रार को सस्पेंड किया गया। महानिरीक्षक पंजीयन किरण कौशल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार सुशील कुमार देहारी को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, जांच अधिकारी बी.एस. नायक को नोटिस दिया है। नायक पर सही ढंग से जांच नहीं करने का आरोप है। दूसरी रजिस्ट्री ऑफिस के पार्किंग में की गई।
दूसरी रजिस्ट्री में पक्षकार कलेक्ट्रेट पार्किंग तक आया। वहीं उप पंजीयक ने पार्किंग में जाकर स्पॉट विजिट रिपोर्ट भरकर रजिस्ट्री कर दी। संपत्ति अग्रोहा गृह निर्माण सहकारी समिति में है। बिना समिति के एनओसी के 20 मार्च 2021 और 19 मार्च 2021 के रजिस्ट्री कर दी गई। तीसरी रजिस्ट्री दिनांक 02 अगस्त 2021 में सोसायटी की परमिशन लगी थी। पहली रजिस्ट्री में टीडीएस कटा है। अन्य दो रजिस्ट्री में टीडीएस नहीं कटा है।
ऐसे होती रही रजिस्ट्री
रायपुरा रिंग रोड अग्रोहा सोसायटी से लगी जमीन नीलम अग्रवाल ने 16 फरवरी 2018 को 7000 हजार वर्गफीट लखनऊ की चिटफंड कंपनी शाइन सिटी ड्रीम रिएल्टर को बेची थी। उसके लिए 4.26 करोड़ जमीन की गाइडलाइन रेट तय कर रजिस्ट्री फीस ली गई। यही जमीन 20 मार्च 2021 को शाइन सिटी कंपनी ने मुंबई के मनमोहन गाबा को बेची। तब उप पंजीयक द्वारा जमीन की दर कम करके 3.64 करोड़ कर दी गई। रजिस्ट्री अधिकारी थे एस.के. देहारी। शाइन सिटी ने मनमोहन सिंह गाबा को बेची गई जमीन फर्जीवाड़ा करते हुए फिर 18 मई 2021 को रुपेश चौबे को बेच दी। तब रजिस्ट्री अधिकारी एस.के. देहारी ने उसका गाइडलाइन रेट घटाकर 2.74 करोड़ कर दिया। याने दाम 4.26 करोड़ से 2.74 करोड़ पर आ गए। पंजीयन विभाग को लगभग 15 लाख का चूना लगाया गया। इसके बाद रुपेश चौबे द्वारा उक्त भूमि 26 जुलाई 2021 को अशोका बिरयानी को बेच दी। इसकी रजिस्ट्री भी उप पंजीयक एस.के. देहारी ने की।
तहसीलदार पर कार्रवाई नहीं
विवाद की जानकारी होने के बाद भी तहसीलदार के द्वारा तीसरी का नामांतरण किया गया। जबकि पहले से हुई दो रजिस्ट्रियों की जानकारी पटवारी द्वारा तहसीलदार को लिखित में दी गई थी। तहसीलदार ने तीसरी रजिस्ट्री का सही मानकर नामांतरण कर दिया था।
Published on:
19 Nov 2022 03:34 pm
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