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12वीं पास ने आईएएस बनकर राजधानी के कारोबारी से 87 से ज्यादा ठगा, सदमे में कारोबारी की मौत, पार्टनर ने दर्ज कराया अपराध

Raipur Fraud News: एक 12वीं पास व्यक्ति ने खुद को आईएएस बताकर राजधानी के कारोबारी से लाखों रुपए ठग लिए।

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Raipur Fraud News: 12th pass cheated by posing as IAS

ठगी

रायपुर। CG Fraud News: एक 12वीं पास व्यक्ति ने खुद को आईएएस बताकर राजधानी के कारोबारी से लाखों रुपए ठग लिए। उसने मेघालय-नागालैंड शासन से सरकारी ठेका दिलाने के नाम पर कारोबारी से 87 लाख रुपए से ज्यादा ले लिया, लेकिन सप्लाई का काम नहीं मिला। बाद में आरोपियों ने पैसा भी वापस नहीं दिया। इस सदमे में कारोबारी की मौत हो गई। उनके बिजनेस पार्टनर ने मामले की शिकायत थाने में की। विधानसभा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।

पुलिस के मुताबिक मेसर्स हनुमान पल्सेस फर्म के संचालकों में रतन झवर, रमेश झवर और अन्य लोग शामिल थे। उनका दाल मील और अनाज ट्रेडिंग का काम है। वर्ष 2017 को ईजीसोर्स सॉल्यूशन एलएलपी पुणे के डायरेक्टर प्रेम रतन शर्मा, विक्रम अदितो, बादशाह मलिक ने रतन झवर से मुलाकात की। प्रेम रतन ने खुद को दिल्ली का आईएएस बताया। उसने दावा किया कि उसकी मेघालय और नागालैंड सरकार में अच्छी जुगाड़ है। वह गेहूं, चावल, शक्कर और दाल सप्लाई करने का ठेका दिला देगा। इससे काफी फायदा होगा।

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शुरू में रतन ने आनाकानी की, लेकिन बाद में तैयार हो गए। इसके बाद कारोबारी रतन के साथ कोलकाता में फर्जी आईएएस प्रेमरतन और उसके साथियों ने मीटिंग की। वहां विक्रम अदितो ने मेघालय सरकार के ज्वाइंट डायरेक्टर फूड एंड सिविल सप्लाई के रूप में पीएम सैयम नामक के व्यक्ति से मिलवाया। बताया कि यही सप्लाई का टेंडर आर्डर निकालेंगे। आरोपियों ने अन्य राज्यों का वर्कऑर्डर भी दिखाया। आरोपियों ने वर्कऑर्डर निकलवाने के एवज में 5 फीसदी कमीशन मांगा। इसमें कारोबारी सहमत हो गया। इसके बाद आरोपियों ने एक वर्क आर्डर की फोटो दिखाया और कहा कि कमीशन मिलने के बाद ऑरिजनल आर्डर देंगे।

कारोबारी ने उन्हें कमीशन के रूप में पहले 15 लाख रुपए उनके बताए बैंक खाते में जमा किया। इसके बाद अलग-अलग नाम से आरोपी उनसे कमीशन की राशि लेते रहे। इस तरह कुल 87 लाख 88 हजार 900 रुपए उनसे ले लिया। इस बीच आरोपियों ने उनके फर्म के नाम से मेघायल और नागालैंड सरकार की ओर से दो वर्क आर्डर दे दिया। वर्क आर्डर के बाद कारोबारी ने माल भेजा। कुछ दिन तक आरोपियों ने ही सप्लाई हुए माल को रख लिया। जब उसका भुगतान नहीं हुआ, तो कारोबारी मेघालय पहुंचा, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। वर्क आर्डर जारी करने वाला पीएम सैयम नाम का कोई अधिकारी नहीं था। आरोपियों द्वारा दिया गया वर्क आर्डर भी फर्जी था।

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चिंता-तनाव से कारोबारी की मौत

वर्ष 2018 में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर कारोबारी रतन झवर ने आरोपियों से कमीशन के रूप में दी गई पूरी राशि वापस मांगी। आरोपियों ने रकम अधिक होने के कारण लौटाने के लिए समय मांगा। इस तरह एक साल से ज्यादा बीत गया। इसके बाद भी आरोपियों ने रकम वापस नहीं किया। इससे चितिंत होकर कारोबारी रतन बीमार हो गए। इससे करीब दो साल पहले उनकी मौत हो गई। मौत के बाद उनके भतीजे रमेश ने मामले की शिकायत पुलिस में की। विधानसभा पुलिस ने आरोपी प्रेमरतन शर्मा और अन्य के खिलाफ धोखधड़ी और साजिश का मामला दर्ज किया है।

दिल्ली की जेल में है आरोपी

ठगी का मास्टरमाइंड प्रेमरतन शर्मा है। वह मूलत: राजस्थान का रहने वाला है, लेकिन दिल्ली में सक्रिय रहता है। खुद को आईएएस बताकर कारोबारियों से मिलता है। दिल्ली की कई कपंनियों को उसने मणिपुर और नागालैंड में एलईडी बल्ब सप्लाई का सरकारी ठेका दिलाने का झांसा देकर ठगा था। चार माह पहले ही दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। रायपुर पुलिस आरोपी को अपने मामले में गिरफ्तार करने जाएगी।

प्रेमरतन को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा है। उसे यहां के मामले में गिरफ्तार किया जाएगा। - दीपक पासवान, टीआई, विधानसभा, रायपुर

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