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ज्ञान उसी का लो जो उस फील्ड में सफल हो : IAS रजत बंसल

'देश के लिए और समाज के लिए कुछ करना है क्योंकि मैं इस नौकरी की संभावनाओं के बारे में जानता ही था।'  यह कहना है आईएएस रजत बसंल का...

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Surya Pratap Goutam

Jun 27, 2016

IAS Rajat bansa

AS Rajat bansa

चन्द्रमोहन द्विवेदी/रायपुर.
'पिताजी आईएफएस रहे हैं तो मैं देखता आ रहा था किस तरह का माहौल रहता है। शुरू से मुझे उन्हें देखकर मेरे मन में इस सर्विस को लेकर निगेटिव माइंड सेट था, लेकिन कुछ इंसीडेंस ऐसे रहे, जिससे अचानक मन में ऐसा हुआ कि अपने लिए नहीं, देश के लिए और समाज के लिए कुछ करना है क्योंकि मैं इस नौकरी की संभावनाओं के बारे में जानता ही था।' यह कहना है आईएएस रजत बसंल का। 'पत्रिका' ऑफिस पहुंचे रजत बसंल से चर्चा के प्रमुख अंश...


प्राइवेट जॉब में लाखों के पैकेज को छोड़कर सरकारी नौकरी को चुनने के पीछे क्या वजह रही?
जवाब : बिट्स पिलानी में सबकुछ अच्छा चल रहा था। तभी एक ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत फ्रांस में छह महीने रहने को मिला। वहां कई ऐसे एक्सपीरिएंस रहे, जिनसे अपने देश के लिए कुछ करने का मन में आया। इसके लिए आईएएस से बेहतर कोई और फील्ड नहीं हो सकता था।


पढ़ाई छोडऩे के बाद तैयारी की शुरुआत कैसे की?
जवाब : फ्रांस से लौटने के बाद इंफोसिस में नौकरी करने के दौरान ही पहला अटैम्ट दिया। पढ़ाई को ज्यादा वक्त नहीं दे पाने के बाद भी पहले अटैम्ट में 168 रैंक आने पर आईपीएस के लिए सिलेक्शन हो गया। दूसरे अटैम्ट की तैयारी में पूरी तरह लग गया। अच्छी बात रही कि दूसरी बार में ही आईएएस के लिए रैंक मुझे मिल गए।


किस तरह की स्ट्रेटजी बनाकर तैयारी की?

जवाब : जब भी आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको ज्ञान देने वाले काफी लोग मिलते हैं। मैंने शुरू से यह तय कर रखा था कि ज्ञान उसी से लेना है, जो सफल हो चुका है। मैंने एक स्ट्रेटजी को फॉलो किया कि जो भी पढूंग़ा, उसका उपयोग कहीं-न-कहीं कर पाऊं। पढ़ी गई हर चीज के लिए डाइमेंशन खोलकर रखता था।


पढ़ाई के लिए क्या चीज मायने रखती है?

जवाब : घंटे गिनने के बजाय पढऩे को लेकर आपका इंट्रेस्ट मायने रखता है। वैसे भी यूपीएससी आपकी इंटेलीजेंसी से ज्यादा आपकी चुनौतियों को स्वीकार करने की कैपिबिलिटी देखता है।


युवा असफलता पर बहुत जल्दी ड्रिपेस हो जाते हैं?

जवाब : असफलता पर चाहिए कि वे अपनी कमी को तलाशें और उसे दूर करने का प्रयास करें। यह भी कहना चाहता हूं कि यूपीएससी के सिलेबस में इतना कुछ है कि आप सिलेक्ट नहीं होते, इसके बाद भी एक अलग तरह का इंसान आप बनकर निकलते हैं।


इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से रहने के बाद भी आर्ट के सब्जेक्ट से यूपीएससी प्रिपेयर करना कैसे संभव रहा?

जवाब : आप किसी भी सब्जेक्ट से एग्जाम दें, जरूरी है कि आपके कॉन्सेप्ट क्लियर हों। इंजीनियरिंग की तरह ही हर सब्जेक्ट में कॉन्सेच्यूअल एप्रोच अपनाएं। जो भी पढ़ें, अंडरस्टैंडिंग से पढ़ें। मटेरियल अब हर जगह अवेलेबल है।


ग्रामीण और शहरी क्षेत्रीयता का कोई असर होता है?

जवाब : ग्रामीण परिवेश के युवाओं में कॉन्फिडेंस की थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन अपनी कमजोरियों को आइडेंटीफाई करके उसे दूर करें। यूपीएससी ज्ञान से ज्यादा आपके एटीट्यूट का आंकलन करता है। बेसकली आपके इमोशनल इंटेलीजेंस को चेक किया जाता है।


अंग्रेजी की अहमियत को कितना मानते हैं?

जवाब : आपको आपके मीडियम में कमांड होना चाहिए, फिर भाषा चाहे कोई भी हो इससे फर्क नहीं पड़ता।


आज युवाओं का मानना है कि आईएएस बनने के बाद सुकूनभरी जिंदगी है?

जवाब : मेरा मानना है कि जिन्हें केवल पैसे कमाने हैं और जिंदगी को सुकूनभरा बनाना है तो वे इस फील्ड में न आएं। जिनके मन में दूसरों केे लिए भी कुछ बेहतर करने लालसा हो, वे यह काम चुनें तो अच्छा होगा।


यूपीएसपी इंटरव्यू में किन बातों का ध्यान रखा जाए?

जवाब : इंटरव्यू में ढोंग न करें। अपने जवाब मेें सामने बैठे व्यक्ति को बेवकूफ बनाने की कोशिश न करें। आपको सवालों के जितना भी जवाब आता है, उतना ही बोलें।


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क्या कोचिंग का कोई असर पड़ता है?
जवाब : आप पढ़ाई कहां कर रहे हैं, इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां भी और जो भी पढ़ें, ईमानदारी से और लगन से पढ़ें।


sucsess Point

टारगेट पर फोकस रखें।

राइटिंग प्रैक्टिस जरूरी।

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आत्मविश्वास रखें साथ ही अपने स्ट्रेंथ और वीकनेस को पहचानें।