'पिताजी आईएफएस रहे हैं तो मैं देखता आ रहा था किस तरह का माहौल रहता है। शुरू से मुझे उन्हें देखकर मेरे मन में इस सर्विस को लेकर निगेटिव माइंड सेट था, लेकिन कुछ इंसीडेंस ऐसे रहे, जिससे अचानक मन में ऐसा हुआ कि अपने लिए नहीं, देश के लिए और समाज के लिए कुछ करना है क्योंकि मैं इस नौकरी की संभावनाओं के बारे में जानता ही था।' यह कहना है आईएएस रजत बसंल का। 'पत्रिका' ऑफिस पहुंचे रजत बसंल से चर्चा के प्रमुख अंश...