
Raipur News: रायपुर फाफाडीह क्षेत्र के एक घर के बाहर कचरे के ढेर में दो सैंड बोआ (दोमुंहा सांप) कई दिनों से लोगों के घर के आस-पास घूम रहे थे, जिसे एक व्यक्ति ने देखा तो वन विभाग व एनजीओ से संपर्क किया। फाफाडीह के सांई नगर जेल रोड में कई दिनों से दो सैंड बोआ (दोमुंहा सांप) खाली प्लॉट के कचरे के ढेर में था, दोनों सांप घर के आस-पास घूमते रहते थे, जिसे अजगर समझकर बच्चे व बूढ़े घर से निकलने में डर रहे थे। शुक्रवार को लोगों ने वन विभाग के अधिकारी और स्नेक हेल्पलाइन एंड कन्सेर्वटिव सोसाइटी साजिद खान से संपर्क किया।
लोग इसे दोमुंहा सांप के रूप में भी जानते हैं। इसके दो मुंह नहीं होते, लेकिन पूंछ का हिस्सा मोटा होता है, जो मुंह की तरह दिखता है। यह सांप जहरीला नहीं होता। सामान्यत: कॉमन सैंड बोआ गांवों में दिखते रहते हैं। इसे गांव में लोग मुसलेडी या मूसलेढी के नाम से भी जानते हैं।
स्नेक हेल्पलाइन एंड कन्सेर्वटिव सोसाइटी के साजिद खान ने बताया मेरे पास सूचना आते ही पहुंचकर सांप को रेस्क्यू किया। लोगों ने दो सांप की जानकारी दी थी, लेकिन एक ही मिला। उसे जंगल की तरफ छोड़ दिया। वहीं जंगल सफारी के सौरभ वर्मा ने कहा मेरे पास 4 बजे सूचना आई तो हम रेस्क्यू करने पहुंचे, लोगों ने बताया कि एक सांप को एनजीओ के साजिद खान ले गया था।
फिलहाल गर्मी है, लेकिन बारिश के कारण सांप से लोग परेशान हो रहे हैं। जशपुर क्षेत्र में सांप और बिच्छू के काटने से कई लोगों की जान चली जाती है।
दोनों सांप की लंबाई करीब 3 फीट का था। सैंड बोआ का कई प्रजाति है, और अलग -अलग नामों से जाना जाता है। एक प्रजाति रेड सैंड बोआ के नाम से जाना जाता है, इसके बारे में झूठी बातें है, रेड सैंड बोआ दुर्लभ प्रजाति का सांप है, जिसके पास होता है, वह काफी धनवान होता है। दवाओं के लिए इसका उपयोग होता है। रेड सैंड बोआ से कई मिथक भी जुड़े हैं, इसलिए तस्करी की खबरें भी आती रहती हैं।
Updated on:
18 May 2024, 12:32 PM IST
Published on:
18 May 2024, 12:32 PM IST
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