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नवानी के कुछ नया करने के जुनून ने नॉस्ट्रम जींस को पहुंचाया बुलंदी पर

पत्रिका’ ऑफिस पहुंचे ‘नॉस्ट्रम’ जींस के एमडी भोजराज नवानी ने शेयर किया सक्सेस मंत्र

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Abhishek Jain

Jun 30, 2016

 Patrika Exclusive Interview with Bhojraj Nawani

Patrika Exclusive Interview with Bhojraj Nawani

चन्द्रमोहन द्विवेदी/ रायपुर.
पहले दमोह (मध्यप्रदेश) और फिर भिलाई में कपड़े की छोटी सी दुकान से शुरू किया गया सफर आज देशभर में बड़े ब्राण्ड के रूप में जाना जाता है। अब कवायद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाने की है। लेकिन यह सफर आसान नहीं है। भूखे पेट और पैदल यात्रा तक की स्थिति से गुजरते हुए आज बड़ी पहचान बनाने में कामयाबी मिली है। यह कहानी है युवाओं के बीच खास पसंद में शामिल ‘नॉस्ट्रम’ जींस के एमडी भोजराज नवानी की। किन हालातों से गुजरकर पाई सफलता, पेश है कहानी उन्हीं की जुबानी...


‘मध्यप्रदेश के दमोह में पिताजी की कपड़े की छोटी सी दुकान थी। कई बार पिताजी के साथ हम भी काम में हाथ बंटाते थे। तब पिताजी की इच्छा नहीं थी कि मैं या मेरा भाई कपड़े का व्यवसाय करें। वे हमें जनरल स्टोर खोलने के लिए कहते रहे। तभी वर्ष 1996 में 26 साल की उम्र में दमोह में ही मैंने ‘सॉरी मैडम’ के नाम से मेंस वियर का एक रिटेल काउंटर शुरू किया। वहां कस्टमर रिस्पॉन्स तो अच्छा था, लेकिन उस शहर की फितरत मुझे नहीं भाती थी। अच्छी जगह काम करने का सोचकर मैं जबलपुर चला गया, लेकिन वहां भी संतुष्टि नहीं मिली। फिर जयपुर गया, लेकिन दिल्ली के करीब होने की वजह से वहां बिजनेस की ज्यादा ऑपच्र्यूनिटी नजर नहीं आई।


वर्ष 2000 में भिलाई में रिटेल शॉप शुरू की। शॉप में हम युवाओं के लिए कुछ नया ही रखते थे, जिससे लगातार हमें अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। इसी बीच हमारे परिचित सुनील माहेश्वरी जी ने मुझे जींस बनाने के लिए प्रेरित किया। पहले तो मैंने उन्हें मना कर दिया, लेकिन उनकी जिद पर मैं इस दिशा में काम करने पर निकल पड़ा। इसके लिए मुझे मुंबई जाना पड़ा। दो लाख 85 हजार रुपए लेकर मैं मुंबई गया। वहां बिजनेस के लिए पैसे बचाने थे, इसलिए 18 महीने तक मैं सुबह की चाय और सिर्फ रात में खाना खाता था। लंबा सफर पैदल चलकर तय करता। 2005 में वह वक्त आया, जब 877 पीस के साथ हमने डायोड (डीआईओडी) ब्राण्ड नेम से अपनी जींस लॉन्च की। इसे सेल करने में 11 महीने लग गए।


एक दिन मन में आया कि कभी न फेल होने वाली चीज मार्केट में लाई जाए, तभी नॉस्ट्रम (नेवर फेल) नाम को हमने इंड्रोड्यूज किया। पहली बुकिंग रायपुर में ही 7500 पीस के साथ की। शुरुआत से ही मन में रहा कि कॉम्पीटिशन किसी से न कर नंबर-वन रहना है। धीरे-धीरे यूथ के बीच हम एक ब्राण्ड नेम के रूप में पसंद किए जाने लगे। आज डिमांड ऐसी है कि सलाना छह लाख पीस हम तैयार कर रहे हैं और टर्नओवर 67 करोड़ जा पहुंचा है।’


हो गया था सब-कुछ खत्म, लेकिन हिम्मत नहीं हारी :

भोजराज नवानी बताते हैं ‘साल 2006 में जुलाई का महीना था। मुंबई में आई बाढ़ में सब-कुछ खत्म हो गया था। हम बर्बाद हो चुके थे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। एक परिचित से 10 लाख रुपए उधार लेकर फिर काम शुरू किया, जुनून ही था कि हम सफल रहे।’


डुप्लीकेसी ने किया परेशान :

बकौल भोजराज ‘यह भी रिकॉर्ड रहा है कि हमारे ब्राण्ड से मिलते-जुलते नाम की 16 कंपनियां मार्केट में उतर आई थीं। यह चुनौतीभरा दौर था। लेकिन स्ट्रेटजी से उन्हें मार्केट छोडऩे पर मजबूर कर दिया।’


खाना बनाने वाले को बना दिया मैनेजर :

एक रोचक हिस्सा शेयर करते हुए भोजराज ने बताया कि मुंबई में स्टेब्लिस होने के बाद खाना बनाने के लिए वे गांव से ही अनंदीलाल पटेल नामक युवक को साथ ले गए थे। एक दिन देखा कि प्राइमरी स्कूल तक पढ़ा पटेल, उनके लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था। यह काम बारकोड बनाने का था, जो भोजराज को भी परेशान करता था। इस दिन से खाना बनाने के लिए रखा वह शख्स उनका मैनेजर बन बैठा।


सक्सेस मंत्र :

-जो भी करें जुनून के साथ करें।

- अपना लक्ष्य बनाकर चलें।

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- मेहनत करने में पीछे न रहें। पॉजिटिव सोच रखें।

- बिजनेस में ग्राउंड लेवल पर भी काम करने को तैयार रहे।

- ईमानदारी होगी तो लोग आपसे जुड़े रहेंगे।