
महादेव सट्टा का ‘कड़ी’ बना राज गुप्ता! ED के सामने सरेंडर के बाद 10-12 बार पूछताछ, 1700 करोड़ की 20 संपत्तियां अटैच(photo-patrika)
Raj Gupta Mahadev App: दुबई से संचालित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में वैशाली नगर निवासी राज गुप्ता जांच एजेंसियों के लिए अहम कड़ी बनकर उभरा है। मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर का करीबी माने जाने वाले राज गुप्ता ने करीब सात महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर दफ्तर में सरेंडर किया था। इसके बाद उससे हुई लगातार पूछताछ ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं।
ईडी अधिकारियों ने राज गुप्ता से अब तक 10 से 12 बार लंबी पूछताछ की। इस दौरान उसने सट्टा ऐप से जुड़े लोगों के नाम, नेटवर्क की कार्यप्रणाली और भारत व दुबई में बनाई गई संपत्तियों के दस्तावेज उपलब्ध कराए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर ईडी ने 24 मार्च को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (क्करूरु्र) के तहत कार्रवाई करते हुए सौरभ चंद्राकर की करीब 1700 करोड़ रुपए की 20 संपत्तियां अटैच कर दीं।
बताया जा रहा है कि दुबई में वीजा अवधि समाप्त होने के बाद राज गुप्ता अवैध रूप से रह रहा था, जिसके चलते उसे डिपोर्ट किया गया। भारत लौटते ही उसने ईडी के सामने सरेंडर कर दिया और जांच में सहयोग शुरू किया। भिलाई आकर रात में अपने साथी प्रखर समेत अन्य के साथ उपवन बार में देखा गया। स्कूटर में आकाश गंगा घूमता रहा। एक रैली में शामिल होकर रील बनाकर पोस्ट भी किया।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार-
राज गुप्ता ने सट्टा नेटवर्क के ऑपरेटरों और फाइनेंशियल चैनल की जानकारी दी।
भारत और दुबई में खरीदी गई लग्जरी संपत्तियों के साक्ष्य सौंपे।
लेन-देन और पैनल संचालन से जुड़े तकनीकी इनपुट दिए।
कथित रूप से जुड़े लोगों और संपर्कों के नाम उजागर किए।
इन खुलासों के बाद ही एजेंसियां बड़े स्तर पर कार्रवाई तक पहुंच सकीं।
महादेव सट्टा ऐप मामले में ईडी अब तक
175 से ’यादा ठिकानों पर छापे मार चुकी है
1३ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
74 लोगों को आरोपी बनाया गया
4336 करोड़ रुपए की संपत्ति अब तक अटैच/फ्रीज की गई
ईडी ने रवि उप्पल, अनिल अग्रवाल और शुभम सोनी सहित अन्य के खिलाफ भगोड़ा अपराधी अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की है।
राज गुप्ता के खिलाफ वर्ष 2022 में दुर्ग के अजोरा चौकी पुलिस ने आबकारी एक्ट की धारा 36(च) के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद वह फरार होकर दुबई चला गया। करीब सात महीने पहले दुबई से लौटने के बाद उसने रायपुर स्थित ईडी कार्यालय में सरेंडर कर दिया । हालांकि, सूत्रों के अनुसार सरेंडर के बाद भी वह समय-समय पर भिलाई आता रहा और रात में दोस्तों के साथ देखा गया। वहीं, वह रायपुर और गोंदिया में भी ठहरता रहा।
जामुल थाना में दर्ज एक पुराने मामले में भी जांच के दौरान राज गुप्ता का नाम सामने आया था। पुलिस उसकी भूमिका और कनेक्टिविटी की जांच पहले से कर रही है।
ईडी के बाद अब मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई भी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, छग के कुछ आईपीएस अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। डिजिटल साक्ष्यों व डाटा रिकवरी से नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
पुलिस और प्रेस कनेक्शन भी जांच में पूछताछ में राज ने कथित तौर पर दो पैनल के जरिए संपत्ति बनाने की बात स्वीकार की और बताया कि इन पैनलों को बाद में घनश्याम नामक युवक को सौंप दिया गया। ईडी ने उससे पुलिस अधिकारियों और मीडिया से जुड़े संबंधों को लेकर भी सवाल किए।
जानकारी के अनुसार, उसने कुछ पुलिस अधिकारियों और दो मीडियाकर्मी के नाम भी बताए हैं। बताया जा रहा है कि भिलाई के तत्कालीन बड़े स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ एक कथित यूट्यूबर के नाम भी जांच में सामने आए हैं।
Updated on:
12 Apr 2026, 12:23 PM IST
Published on:
12 Apr 2026, 12:23 PM IST
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