
ताबीर हुसैन @ रायपुर . कुछ लोग किसी हुनर में इतने पारांगत होते हैं कि कॅरियर भी उसी क्षेत्र में बनाते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ शौक से अपनी रुचिकर कार्यों में वक्त देते हैं। आज आपको सिटी की रंगोली आर्टिस्ट रंजना सिंघई से रूबरू करवा रहे हैं। वे कोई प्रोफेशनल रंगोली आर्टिस्ट तो नहीं लेकिन घर पर ही बहुत अच्छी रंगोली बना लेती हैं।
रंगोली कहां से सीखा?
जिन चीजों में आपका इंटरेस्ट हो वे खुद-ब-खुद नेचर में आने लगती हैं। मैंने कहीं भी रंगोली बनाने की ट्रेनिंग नहीं ली लेकिन जो थॉट आते हैं उनमें रंगों को भरती हूं और उसे सभी पसंद करने लगते हैं। वैसे मैं बड़ी रंगोलियां ज्यादातर दिवाली के मौके पर ही बनाती हूं। आम तौर पर मुझे नेचर से रिलेटेड रंगोली पसंद है। पर्व में रंगोली का अपना अलग महत्व है।
कैसे आते हैं आइडिए?
हमारे आसपास सबकुछ घटित होता रहता है। ये आप पर डिपेंड करता है कि उसे कितना ऑब्जर्व करते हैं। आपका नजरिया कैसा है यह भी मायने रखता है क्योंकि किसी भी फील्ड में दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। सब आइडिए यहीं से मिल जाते हैं।
कब से बना रही हैं रंगोली?
करीब 24 सालों से मैं रंगोली बना रही हूं। ये सिर्फ शौक रहा है। काफी प्राइज भी मिले हैं। लोग पसंद करते हैं तो अच्छा लगता है। मैंने कभी बाहर पार्टिसिपेट नहीं किया। अब तक केवल घर पर ही बनाई है। मेरा मानना है कि घर पर रंगोली बनाने से समृद्धि आती है।
आप इस हुनर तो औरों को भी सिखाती हैं?
जी। मैं गरीब बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देती हूं। दरअसल, कोई भी ज्ञान बांटने से ही बढ़ता है। लोग आपको किस तरह याद रखते हैं, यह आपके किए गए काम पर डिपेंड करता है। जितना हो सके लोगों को खुशी दे सकूं और रंगोली के अलावा मेहंदी भी सिखा सकूं यही मेरा सोचना है।
Published on:
23 Apr 2018 06:02 pm
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