
Chhattisgarh Government Employees(photo-patrika)
Chhattisgarh Government Employees: छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों, मिशनों और विभिन्न योजनाओं में काम कर रहे लाखों संविदा, अनियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इन कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित कर्मचारियों की तरह ही जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें बहुत कम अधिकार मिलते हैं। सबसे बड़ी समस्या छुट्टियों को लेकर है। बीमारी, पारिवारिक परेशानी या किसी जरूरी काम के लिए छुट्टी लेने पर कई जगहों पर वेतन काट लिया जाता है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न पर्याप्त अवकाश मिलता है और न ही मेडिकल लीव जैसी सुविधाओं का लाभ मिल पाता है।
प्रदेश के स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, कृषि, जल संसाधन समेत कई विभागों में बड़ी संख्या में संविदा और प्लेसमेंट कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों के अनुसार अधिकांश विभागों में सालभर में केवल 12 कैजुअल लीव (सीएल) का प्रावधान है। मेडिकल लीव, अर्जित अवकाश और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिलने से कर्मचारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि जब भी वे अवकाश या अन्य सुविधाओं की मांग करते हैं तो अधिकारियों की ओर से नियमों और प्रावधानों का हवाला देकर मांगों को टाल दिया जाता है। अधिकारियों का कहना होता है कि नियुक्ति की शर्तें केंद्र सरकार या संबंधित परियोजनाओं के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर बदलाव संभव नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि बीमारी, पारिवारिक समस्या या अन्य जरूरी कारणों से यदि उन्हें अवकाश लेना पड़ता है तो संबंधित एजेंसियां और विभाग सीधे वेतन में कटौती कर देते हैं। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एक-दो दिन की अनुपस्थिति पर भी वेतन काट लिया जाता है, जिससे आर्थिक परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
अनियमित कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बीमारी किसी को भी हो सकती है। उनका सवाल है कि क्या केवल नियमित कर्मचारी ही बीमार पड़ते हैं? यदि संविदा और प्लेसमेंट कर्मचारी भी सरकारी दफ्तरों में जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं, तो उन्हें भी मानवीय आधार पर छुट्टी और वेतन सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
नगरीय निकाय कर्मचारी महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संजय सिंह और छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के अध्यक्ष गोपाल साहू ने राज्य सरकार से संविदा और प्लेसमेंट कर्मचारियों के लिए एक समान सेवा नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि नई नीति में मेडिकल लीव, मातृत्व-पितृत्व अवकाश, आकस्मिक अवकाश और वेतन सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो असंतोष बढ़ सकता है। उनका मानना है कि सरकार को लाखों संविदा और प्लेसमेंट कर्मचारियों की स्थिति पर गंभीरता से विचार कर उनके लिए व्यावहारिक और मानवीय सेवा नियम लागू करने चाहिए।
Published on:
05 Jun 2026 11:09 am
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