
भीषण गर्मी का कहर उल्टी-दस्त के मरीज बढ़े (Photo Patrika)
Heat Wave: @पीलू राम साहू। भीषण गर्मी में लू के अलावा फूड पाइजनिंग व उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पेट में इंफेक्शन व पेट दर्द के केस भी आ रहे हैं। एम्स, आंबेडकर अस्पताल व जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या 20 फीसदी के आसपास हैं। खासकर मेडिसिन व पीडियाट्रिक विभाग में लगातार ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। पेट में इंफेक्शन व पेट दर्द वाले मरीजों में 5 से 20 साल की उम्र के बच्चे व किशोर शामिल हैं। ठंडी चीजें खाने के कारण गले में इंफेक्शन वाले मरीज भी आ रहे हैं।
आंबेडकर अस्पताल व जिला अस्पताल में भर्ती व ओपीडी में आने वाले ज्यादातर बच्चे तेज बुखार, उल्टी-दस्त व निमोनिया से पीड़ित हैं। डॉक्टरों के अनुसार गर्म मौसम में साल्मोनेला, ई. कोलाई व लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते हैं। इससे खाना जल्दी खराब होता है। इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। गर्मी में स्ट्रीट फूड भी फूड पॉयजनिंग की बड़ी वजह है। खुले में बिक रही खाद्य सामग्री में मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। धूल भी चिपक जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार फूड पाॅइजनिंग सिर्फ पेट खराब होने की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल करीब 60 करोड़ लोग यानी दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं। इनमें से 4.2 लाख की मौत हो जाती है। हर साल 5 साल से कम उम्र के सवा लाख बच्चों की मौत फूड पाॅइजनिंग के कारण हो जाती है।
सड़क किनारे बिकने वाले गोलगप्पे, बर्फ के गोले, चाट व कटे फल फूड पाइजनिंग के मुख्य कारण हैं। कई दुकानदार बिना ढंके खाद्य सामग्री बेच रहे हैं। इससे धूल व बैक्टीरिया सीधा खाने में पहुंचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक 5 से 20 साल के बच्चों व किशोरों में सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। गर्मी में शरीर का मेटाबॉलिज्म भी बदलता है। खानपान में सावधानी नहीं बरती जाए तो पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इस मौसम में सही तरह से भोजन पकाना व स्टोर करना जरूरी है। साफ पानी का इस्तेमाल करना खासकर 20 मिनट तक पानी को उबालकर पीने से कीटाणु मर जाते हैं।
आंबेडकर व जिला अस्पताल में लू वार्ड बनाया गया है। अभी कोई भी मरीज भर्ती नहीं है। चूंकि भीषण गर्मी तीन-चार दिन पहले पड़नी शुरू हुई है। इसलिए मरीज ओपीडी में ज्यादा आ रहे हैं। जिन्हें ज्यादा समस्या है, ऐसे मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। ऐसे मरीजों को मेडिसिन व पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लू के मरीजों के लिए दवाइयों का पर्याप्त स्टाॅक है। ओआरएस पैकेट के अलावा जरूरी सिरप भी है।
डॉ. आरके
Updated on:
18 Apr 2026 05:14 pm
Published on:
18 Apr 2026 05:14 pm
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