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महाधिवक्ता इस्तीफा मामला : डेढ़ महीने से बंद थी तिवारी कि CM से बातचीत, सरकार ने चिट्ठी को बनाया इस्तीफा पत्र

* कनक तिवारी (Chhattisgarh advocate general) ने कहा, मेरे साथ धोखाधड़ी हुई है, डेढ़ महीने से बंद थी सीएम (Bhupesh baghel) और पूर्व महाधिवक्ता(Kanak tiwari) की बातचीत  

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महाधिवक्ता इस्तीफा मामला : डेढ़ महीने से बंद थी तिवारी कि CM से बातचीत, सरकार ने चिट्ठी को बनाया इस्तीफा पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व महाधिवक्ता (Solicitor general ) कनक तिवारी ने अपने इस्तीफे को लेकर सरकार पर जोरदार आक्रमण किया हैं। पत्रिका से बातचीत में कनक तिवारी (ex Solicitor general) ने कहा है कि महाधिवक्ता और सरकार का रिश्ता मुवक्किल और वकील का है ।मेरा मुवक्किल नहीं चाहता कि मैं उसकी पैरवी करूँ तो मैं नहीं करूँगा। मेरे साथ धोखाधड़ी की गई है। विधि विभाग के प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा और अन्य कुछ लोग सरकार को मेरे विरुद्ध भडक़ाते रहे हैं।

विधि विभाग के प्रमुख सचिव ने कनक तिवारी के आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पूर्व महाधिवक्ता को जिस प्रकार की भी प्रशासनिक सहायता की जरुरत रही है वो प्रदान की गई है। प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा से जब यह पूछा गया कि पूर्व महाधिवक्ता द्वारा वह पत्र कब लिखा गया, जिसमे उन्होंने काम न करने की इच्छा जाहिर की है तो उन्होंने कहा, कि उस पत्र का ब्यौरा देना संभव नहीं है।

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वॉट्सएप के भरोसे सरकारी काम काज
कनक तिवारी ने बताया कि पिछले डेढ़ माह से उनकी और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की न तो कोई बातचीत हुई है न ही मुलाक़ात हुई है। उन्होंने बताया कि मेरे द्वारा वॉट्सएप पर जरूरी मामलों में अपनी राय सीएम को भेज दी जाती थी, जिसे वे देख लेते थे लेकिन कभी किसी मैसेज का जवाब भी नहीं भेजा। किसी भी किस्म की कानूनी कार्रवाई से साफ़ इनकार करते हुए कनक तिवारी ने कहा कि सरकारी काम काज में 50 किस्म की चिट्ठियां लिखी जाती हैं, ऐसे में किसी चिट्ठी को इस्तीफा बना देना अजीब है। मुमकिन है मैंने किसी पत्र में लिखा हो कि अगर मुझे सहयोग न मिला तो काम करना मुश्किल होगा । लेकिन यह इस्तीफा कैसे हो सकता है ? उन्होंने कहा कि मुझे कुछ दिनों से अनुमान था कि ऐसा कुछ होने जा रहा है ।


रविंद्र चौबे ने किया था फोन
कनक तिवारी ने बताया, शुक्रवार रात मंत्री रविंद्र चौबे का उनके पास फोन आया था। उन्होंने पूछा कि आपने ऐसी कोइ्र इच्छा व्यक्त की थी क्या। चौबे बीमारी के दिल्ली में आराम कर रहे हैं। विधि एवं विधायी कार्य विभाग उन्हीं के पास था।


सरकार ने कहा सब नियम कायदे से
विधि एवं विधायी कार्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि महाधिवक्ता के इस्तीफे के लिए राज्यपाल का अनुमोदन आवश्यक है । अगर राज्यपाल का अनुमोदन है तो निश्चित तौर पर इसमें कनक तिवारी की काम न करने की अनिच्छा का दस्तावेज भी होगा । उन्होंने कहा कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कनक तिवारी के इस्तीफे को मंजूरी और सतीश चन्द्र वर्मा की बतौर महाधिवक्ता नियुक्ति एक साथ की है ।