
एम्स के स्पेशल डायबिटीक फुट क्लीनिक में लगी तीन नई मशीनें, पैरों के झनझनाहट की हो सकेगी जांच
एम्स रायपुर के स्पेशल डायबिटीक फुट क्लीनिक में तीन नई मशीनें लगाई गई हैं। इसके माध्यम से मरीजों में डायबिटीज की जांच अब और आसानी से हो सकेगी। पैरों के झनझनाहट, सुन्न पड़ने पर इसकी जांच की जाएगी। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विनय आर. पंडित ने बताया, एम्स में औसतन 300 मरीज मेडिसिन विभाग में उपचार के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं। इनमें एक तिहाई मधुमेह के रोगी होते हैं। इसके लिए स्पेशल डायबिटीक फुट क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 2 से 4 बजे के बीच संचालित किया जा रहा है।
डायरेक्टर प्रो. डॉ. नितिन एम. नागरकर ने डायबिटीज के बढ़ते मरीजों की संख्या को चुनौतीपूर्ण बताते हुए समय पर उपचार शुरू करने का आह्वान किया। उनका कहना था, बदलती लाइफ स्टाइल से डायबिटीज महामारी के रूप में सामने आ रहा है। अतः समय पर इसकी रोकथाम आवश्यक है। एम्स के मेडिसिन विभाग और एंडोक्रायोनोलॉजी विभाग मिलकर डायबिटीज के गंभीर मरीजों को अत्याधुनिक उपचार प्रदान कर रहे हैं।
रोजाना औसतन 8 डायबिटीक फुट मरीज
डॉ. रोहिणी रोक्कम ने बताया, स्पेशल क्लीनिक में औसतन आठ डायबिटीक फुट रोगी पहुंच रहे हैं, जिन्हें गैंगरीन या सेलुलाइटिस के उपचार की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने बताया, डायबिटीक फुट के मरीजों के लिए एम्स में बायो थिश्यूमीटर, पोडिया स्कैन और एबीआई डॉप्लर की सुविधा शुरू की गई है। इनकी मदद से वायब्रेशन सेंशेन, दबाव और वस्कुलर डिजीज की जांच आसानी से की जा सकती है।
खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी
एम्स डायरेक्टर डॉ. नागरकर ने सेंट्रल डोम में नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं द्वारा आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। पोस्टर प्रदर्शनी में मधुमेह-1 और मधुमेह-2 के प्रकार समझाते हुए खाने और दिनचर्या में बदलाव को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही मधुमेह के प्रारंभिक लक्षण, इंसुलिन और डायबिटीक फुट के बारे में भी कई रोचक जानकारियां प्रदान की गई। छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी रोगियों और परिजनों के मध्य मधुमेह को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया।
Published on:
15 Nov 2022 07:41 pm
