23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल, बंदियों को मिली विशेष सुविधाएं

CG News: जेल अधीक्षक ने बताया कि उपवास रखने वाले बंदियों को जेल प्रशासन के द्वारा फलाहार के रूप में प्रतिदिन केला, साबूदाना, फल्लीदाना, गुड़ दिया जा रहा है।

2 min read
Google source verification
CG News: नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल, बंदियों को मिली विशेष सुविधाएं

नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल (Photo Patrika)

CG News: @ राहुल जैन। प्रदेश की सभी जेलों में नवरात्रि पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर परिरुद्ध बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वे धार्मिक आस्था के अनुरूप उपवास एवं पूजा-अर्चना कर सकें। प्रदेश की जेलों में कुल 2397 बंदी नवरात्रि का उपवास कर रहे हैं, जिनमें 2125 पुरुष एवं 272 महिला बंदी शामिल हैं।

यह आंकड़ा न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि जेलों में सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण के सृजन का भी परिचायक है। इसमें रायपुर संभाग के 1140 बंदी, दुर्ग संभाग में 243 बंदी, बिलासपुर संभाग में 407 बंदी, सरगुजा संभाग में 361 बंदी, बस्तर संभाग में 246 बंदी अपनी आस्था अनुसार उपवास का पालन कर रहे हैं।

नवरात्रि के दौरान जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को फलाहार, स्वच्छ पेयजल, पूजा सामग्री एवं निर्धारित समय पर आरती-पूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मनोबल को सुदृढ़ करने और उनमें सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल न केवल बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान है, बल्कि उनके मानसिक एवं आध्यात्मिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

बंदियों को प्रतिदिन दिया जा रहा फलाहार

जेल अधीक्षक ने बताया कि उपवास रखने वाले बंदियों को जेल प्रशासन के द्वारा फलाहार के रूप में प्रतिदिन केला, साबूदाना, फल्लीदाना, गुड़ दिया जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम बंदियों के मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास में सहायक होते हैं, तथा उनके पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा

यह पहल न केवल बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान है, बल्कि उनके मानसिक एवं आध्यात्मिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। विगत दिनों विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया था कि जेलों को अब सजा घर नहीं बल्कि सुधार एवं पुनर्वास गृह के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसमें उन्हें विभिन्न कलाओं को सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज से जोड़ने और बेहतर जीवन के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

सुधारात्मक सोच की ओर बढ़ती जेल व्यवस्था

पारंपरिक रूप से जेलों को केवल दंड देने की जगह माना जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार की नीति के तहत इन्हें सुधार और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। विजय शर्मा के अनुसार, बंदियों को कौशल प्रशिक्षण, सांस्कृतिक गतिविधियों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज से दोबारा जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।