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इम्पैनलमेंट के लिए रखी ऐसी शर्तें कि करोड़ों का लाभ चुनिंदा एजेंसियों को

जल संसाधन विभाग का कारनामा, क्वालिफिकेशन क्राइटेरिया की आड़ में बड़ा खेल, 5 लाख से 10 करोड़ के प्रोजेक्ट तैयार करने कंसल्टेंसी का चयन करने का मामला, क्वालिफिकेशन क्राइटेरिया ऐसा- ज्यादातर एजेंसियां पार्टिसिपेट नहीं कर पाएंगी

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इम्पैनलमेंट के लिए रखी ऐसी शर्तें कि करोड़ों का लाभ चुनिंदा एजेंसियों को

इम्पैनलमेंट के लिए रखी ऐसी शर्तें कि करोड़ों का लाभ चुनिंदा एजेंसियों को

रायपुर. जल संसाधन विभाग में कंसल्टेंसी के लिए इम्पैनलमेंट की ऐसी निविदा निकाली गई है जिसकी शर्तें कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। 5 लाख से 10 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए विभाग अब उन्हीं एजेंसियों को काम देगा जिन्होंने डिपार्टमेंट के 15 प्रोजेक्ट पूरे किए हों। टेंडर की परंपरा के मुताबिक आमतौर पर 2 या 3 प्रोजेक्ट का ही अनुभव मांगा जाता है। विभाग के इस हैरतअंगेज कारनामे ने प्रदेश की बड़ी कंसल्टेंसी एजेंसियों को भी उलझन में डाल दिया है कि इस क्राइटेरिया को वे पूरा करें कैसे?

गौरतलब है कि जल संसाधन विभाग ने हाल ही में कंसल्टेंसी एजेंसी नियुक्त करने के लिए निविदा निकाली है। ये एजेंसियां प्रदेश में 5 लाख से लेकर 10 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट के लिए सर्वे, इन्वेस्टिगेशन, ड्राइंग-डिजाइन और एस्टीमेट तैयार करेंगी। करोड़ों के इस काम में चुङ्क्षनदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग ने स्पेशल कंडीशन तैयार की है। इसके तहत एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया ऐसा तय किया गया है कि ज्यादातर लोग रिजेक्ट हो जाएंगे।

विभाग ने ऐसी एजेंसियों से निविदा मंगाई है जिन्हें जल संसाधन विभाग में 15 प्रोजेक्ट पूरा करने का अनुभव हो। यह बहुत ज्यादा है। इस क्राइटेरिया को बड़ी-बड़ी कंपनियां भी पूरी नहीं कर पाएंगी। टर्न ओवर की बात करें तो महज 1 करोड़ का टर्नओवर मांगा गया है। साफ है कि नियम और मापदंड संतुलित नहीं हैं। चहेती एजेंसियों को लाभ पहुंचाने की ²ष्टि से ही इस तरह का क्वालिफिकेशन क्राइटेरिया तय किया गया है। बता दें कि इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है।

नियमित कर्मचारियों का सेटअप सबका सैलरी स्टेटमेंट भी मांगा

आमतौर पर टेंडर में कर्मचारियों का सैलरी स्टेटमेंट नहीं मांगा जाता। जल संसाधन विभाग ने जो निविदा निकाली है उसमें नियमित-अनियमित कर्मचारियों की संख्या के साथ उनका सैलरी स्टेटमेंट भी मांगा है। यह भी ऐसी कंडीशन है जिसके चलते प्रदेश में सालों से काम कर रही एजेंसियां कॉम्पीटिशन में पार्टिसिपेट नहीं कर पाएंगी। इन्हीं ङ्क्षबदुओं को देखते हुए विभाग द्वारा तय किए गए नियमों और मापदंडों पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।

हर साल विभाग करोड़ों रुपए के ठेके निकालता है

जल संसाधन मतलब यानी पीने के पानी, ङ्क्षसचाई, डैम का निर्माण करने वाला विभाग। कुल मिलाकर सीधे जनता से जुड़ा विभाग। डिपार्टमेंट द्वारा हर साल प्रदेशभर में करोड़ों रुपए का ठेका निकाला जाता है। कंसल्टेंसी एजेंसी नियुक्त होने के बाद इन सभी कामों के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने का काम भी उस एजेंसी को मिल जाएगा। इस पर भी हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं।

जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर इंद्रजीत उइके ने बताया कि कंसल्टेंसी के लिए इम्पैनलमेंट के क्या नियम और शर्तें तय की गई हैं, इसे रायपुर आकर चेक करवाता हूं। फिलहाल बाहर हूं।