
पंच से राष्ट्रपति तक चुनाव लडऩे वाले सुल्तान सिंह नहीं रहे (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत’ इस कहावत को जीवन में उतारने वाले सुल्तान सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को शहर से लगे ग्राम चौबेबंधा में पैरी नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
सुल्तान सिंह 80 और 90 के दशक में अपनी अलग पहचान के लिए जाने जाते थे। उन्होंने पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक कई चुनाव लड़े, लेकिन किसी में जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ। बुलेट की धक-धक आवाज और मूंछों पर ताव के साथ वे पूरे क्षेत्र में चर्चित रहे।
उन्होंने छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और बिहार से भी चुनाव लड़ा। वे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे, वहीं कई बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी किस्मत आजमाई। बताया जाता है कि समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध थे। राजिम विधानसभा चुनाव में उन्हें ‘बकरी छाप’ चुनाव चिह्न मिला था। उस समय उन्होंने जोरदार प्रचार किया, लेकिन जीत नहीं मिली। हालांकि लोगों के दिलों में उन्होंने अपनी अलग जगह बनाई।
उन्होंने खुद पंच का चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। वहीं अपनी पत्नी को सरपंच बनाने में वे सफल रहे। चुनाव लड़ना उनके लिए केवल शौक नहीं, बल्कि जुनून था। उनके करीबी विष्णु राम जांगड़े ने बताया कि सुल्तान सिंह राजनीति की अच्छी समझ रखते थे। अजीत जोगी और लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं से भी उनके संबंध रहे। स्थानीय लोगों ने उन्हें निडर, स्पष्टवादी और ईमानदार व्यक्तित्व बताया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
Published on:
27 Feb 2026 10:29 am
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