
CG Election 2023: वादों-इरादों पर टिकी सरकार की ‘नींव’
रायपुर पत्रिका @ राहुल जैन। Chhattisgarh Election: छत्तीसगढ़ में चुनावी शुरुआत होते ही आम जनता को कांग्रेस-भाजपा के घोषणा पत्र का ब्रेसब्री से इंतजार है। यह तय है कि पिछली बार की तरह इस बार भी सरकार की नींव वादों और इरादों पर टिकी रहेगी। यही वजह है कि दोनों बड़े राजनीतिक दल लगातार एक- दूसरों के वादों और इरादों पर सवाल उठाकर जनता के सामने पोल खोलने में लगे हैं। कांग्रेस अपने वादों को पूरा करने के साथ भाजपा के अधूरे वादों को गिना रही है। ठीक इसके विपरीत भाजपा 15 साल के विकास और वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही है।
कांग्रेस की ताकत
सरकार के गठन के पहले दिन ही किसानों अल्पकालीन ऋण माफ किया गया। किसानों को इनपुट स ब्सिडी के लिए 2500 रुपए समर्थन मूल्य देने का काम किया। छत्तीसगढ़ के गौरव को बढ़ाने के लिए राजगीत और परापंरागत त्योहारों को महत्व दिया। इसके अलावा राजीव गांधी मजदूर न्याय योजना, बेरोजगारी भत्ता जैसे योजनाओं के जरिए जनता के बीच पहुंचने का काम किया।
कांग्रेस की कमजोरी
कांग्रेस ने शराबबंदी करने और कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था। अभी यह वादा पूरा नहीं हुआ है। कर्मचारियों में नाराजगी है। वहीं ईडी लगातार वि भिन्न मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही है। सरकार के वरिष्ठ अफसरों के अलावा कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस टिकट वितरण करने के मामले में भी पिछड़ गई है।
कांग्रेस-भाजपा से ये वादें मिल सकते हैं
1 धान खरीदी का समर्थन मूल्य 3600 रु. प्रति क्विंटल।
2 महिलाओं के लिए सस्ता गैस सिलेंडर।
3 युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ता।
4 गोबर खरीदी पांच रुपए किलो की दर से।
5 महंगे बिजली बिल से राहत देने, विद्युत खपत की यूनिट में छूट।
भाजपा की ताकत
भाजपा ने समय से पहले टिकट की घोषणा कर उम्मीदवारों को प्रचार का ज्यादा समय दिया है। रणनीति के तहत 43 सीटों पर नए चेहरों को मौका देकर जनता की नाराजगी दूर करने की को शिश की है। इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं को पार्टी आधार बनाकर जनता के बीच जा रही है। 15 साल के विकास कार्य भी अहम है। भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध को अपनी ताकत बनाने का प्रयास कर रही है।
भाजपा की कमजोरी
15 साल के शासन में भाजपा के बहुत से वादें अधूरे हैं। किसानों को दो साल का बोनस नहीं मिला। भाजपा सरकार के समय घोटालों को कांग्रेस आज भी गिना रही है। ट्रेनों के रद्द होने और लेटलतीफी का नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा भाजपा में गुटबाजी खत्म नहीं हुई है। टिकट वितरण से बहुत सी विधानसभा सीटों में असंतोष है।
इसलिए किसानों पर ज्यादा फोकस
छत्तीसगढ़ में किसानों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। 26 लाख से अ धिक किसानों न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचते हैं। इसकी दखल शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्र में हैं। पिछले चुनाव में किसानों के लिए की गई घोषणाओं ने सरकार की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थीं।
इसलिए महिलाओं पर ज्यादा फोकस
इस बार के विधानसभा चुनाव में राजनीकि दलों के लिए महिला ही भाग्य विधाता बनेंगे। दरअसल, प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 3 लाख 60 हजार 240 है। इसमें से 1 करोड़ 1 लाख 20 हजार 830 पुरुष मतदाता एवं 1 करोड़ 2 लाख 39 हजार 410 महिला है। यानी इस बार महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है।
Published on:
19 Oct 2023 04:22 pm
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