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छत्तीसगढ़ की विरासत हैं देवार शैली में प्रचलित गीत-संगीत, कला-संस्कृति और नाचा-गम्मत, मंत्री ने इन्हें संजोने के लिए बनाया ये प्लान

मंत्री भगत ने कहा कि पंथी नृत्य, राऊत नृत्य देश और विदेश में प्रसिद्ध है। इसलिए विभागीय अधिकारी एक प्लान बनाकर अच्छे ढंग से कार्य करें तो हमें बेहतर परिणाम मिलेंगे।

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छत्तीसगढ़ की विरासत हैं देवार शैली में प्रचलित गीत-संगीत, कला-संस्कृति  और  नाचा-गम्मत, मंत्री ने इन्हें संजोने के लिए बनाया ये प्लान

संस्कृति मंत्री की अध्यक्षता में छत्तीगसगढ़ संस्कृति परिषद् के सदस्यों की बैठक संपन्न

रायपुर. छत्तीसगढ़ में संस्कृतियों को संरक्षण के लिए तेजी से प्रयास करने पर सहमति बनी है। गुरुवार को राज्य के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद् की बैठक हुई। बैठक में अकादमियों और शोधपीठ के अध्यक्ष एवं सदस्य विशेष रूप से शामिल हुए।
इन्हें सहेजने के लिए उपाय
बैठक में संस्कृति मंत्री भगत ने बैठक में कहा कि प्रदेश के विविध लोककला शैलियों की तरह देवार शैली में प्रचलित गीत-संगीत, कला-संस्कृति, नाचा-गम्मत राज्य की विरासत है। इसे सहेजने के लिए विशेष उपाय किए जाएं। उन्होंने करतब दिखाने वाले नट समूहों के कलाबाज लोगों को ढूंढ कर उनके संरक्षण और संवर्धन करने पर जोर दिया।

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बिन्दुवार चर्चा की गई

बैठक में वित्तीय वर्ष 2022-23 में किए गए कार्यों तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 में किए जाने वाले कार्य योजनाओं के संबंध में बिन्दुवार चर्चा की गई। बैठक में अकादमियों और शोधपीठ के अध्यक्षों व सदस्यों ने कला संस्कृति की अलग-अलग विधाओं को संरक्षित करने उनके संवर्धन तथा नवाचार के संबंध में अपने-अपने कार्ययोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मंत्री भगत ने संस्कृति विभाग का एक अलग 'लोगो तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
बैठक में ये रहे उपस्थित
परिषद् की बैठक में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित छत्तीसगढ़ सिंधी अकादमी के अध्यक्ष राम गिडलानी, आदिवासी एवं लोक कला अकादमी के अध्यक्ष नवलकिशोर शुक्ल, कला अकादमी के निदेशक योगेन्द्र त्रिपाठी, श्रीकांत वर्मा शोधपीठ के अध्यक्ष रामकुमार तिवारी, चित्रकला-मूर्तिकला विशेषज्ञ सुनीता वर्मा, नृत्यकला विशेषज्ञ वासंती वैष्णव, कला विशेषज्ञ भूपेश तिवारी, छत्तीसगढ़ राजभाषा के सचिव डॉ. अनिल भतपहरी, सिंधी अकादमी सदस्य के उपाध्यक्ष नानक रेलवानी, लोक कला अकादमी के सदस्य कालीचरण यादव सहित संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।