
महामाया के स्वरुप का ज्ञान होते ही जीव को संसार के बंधन से मुक्ति: इंदुभवानंद महाराज
Chhattisgarh News: रायपुर। जब तक व्यक्ति मोह माया में फंसा हुआ तब तक मोक्ष का मार्ग पीछे छूट जाता है। महामाया परब्रह्मा की इच्छा शक्ति है, विधि पूर्वक उपासना से सभी मनोरथ पूर्ण होता है। जीव का कल्याण होता है। गुप्त नवरात्रि में महामाया मंदिर में देवी भागवत पुराण की कथा सुनाते हुए इंदुभवानंद महाराज ने ये बातें कही।
महामाया सार्वजनिक न्यास ट्रस्ट पुरानी बस्ती की ओर कथा आयोजित की गई है, यहां कथा सुनने के लिए अनेक स्थानों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज के परमप्रिय शिष्य तथा शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. इन्दुभवानन्द महाराज ने बताया कि मोह ही ममता का कारण है। मोह से आकर्षित होकर व्यक्ति एक दूसरे के प्रति समर्पित होता है, जिसे धर्म शास्त्र में अविद्या कहा जाता है। अर्थात जब तक महामाया के स्वरूप का ज्ञान नहीं होता है तब तक जीव संसार के बंधन में फंसा रहता है।
महामाया ही संसार की रचनाकार
महामाया प्रभु की इच्छा शक्ति हैं परम ब्रह्म की इच्छा के अनुसार सारे संसार की रचना का कार्य करती हैं, सृष्टि और संहार ही महामाया का कार्य माना जाता है। इसलिए गीता में भगवान स्वयं कहते हैं कि मेरी अध्यक्षता में प्रकृति चर और अचर जीवों का सृजन करती है। महाराज ने कहा कि विद्या और अविद्या दोनों परब्रह्म परमात्मा की गुणमयी माया के भेद है। कथा को विस्तार देते हुए श्रीकृष्ण जन्म और राम देवी की कथा का श्रवण कराया।
ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द आज शंकराचार्य आश्रम में
ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ अध्यक्ष राजराजेश्वरी सेवा कोष परमहंसी गंगा आश्रम तथा अध्यक्ष राजराजेश्वरी सेवा ट्रस्ट कोलकाता के ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद सड़क मार्ग से रविवार को बोरियाकला शंकराचार्य आश्रम में पहुंच रहे हैं। यहां परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर से शाम को पधारेंगे। सोमवार को सत्संग के बाद 27 जून को सुबह की नियमित विमान से कोलकाता के लिए रवाना होंगे।
Published on:
25 Jun 2023 10:07 am
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