
छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र (photo source- Patrika)
CG Vidhansabha: विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण के लिए शासकीय संकल्प पेश किया। इसे लेकर दिनभर सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। आरोप-प्रत्यारोप को लेकर जमकर तीर चले। इससे कई बार हंगामा और शोर-शराबा की स्थिति देखने को मिली। सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से महिलाओं ने मोर्चा संभाल रखा था।
पुरुष विधायकों की टीका-टिप्पणी को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज हुई। इस दौरान लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित नहीं होने के लिए सीधे तौर पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया और कहा, कि विपक्ष ने दशकों से महिलाओं का हक छीनने का काम किया है। वहीं विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वो महिला आरक्षण का विरोधी नहीं है। उनका कहना था कि जब 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसहमति से पारित हो गया है, तो इसे तत्काल लागू करें। शासकीय संकल्प में चर्चा की शुरुआत सत्ता पक्ष की ओर से पूर्व मंत्री लता उसेंडी ने और विपक्ष की ओर से पूर्व मंत्री अनिला भेडिय़ा ने की।
सभापति की जिम्मेदारी दो महिला को भी: सत्र के दौरान सभापति तालिका की भी घोषणा हुई। महिलाओं के सम्मान देने के लिए 2 महिला विधायकों को सभापति तालिका में शामिल किया गया है। इसमें सत्ता पक्ष की ओर से लता उसेंडी और विपक्ष की ओर से अनिला भेडिय़ा का नाम
शामिल रहा।
महिला जनप्रतिनिधि सहित अंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पहुंचीं: विशेष सत्र के लिए नगरीय निकाय और त्रि-स्तरीय पंचायत से चुनी गई जनप्रतिनिधियों को खास तौर पर आमंत्रित किया गया था। सभी ने दर्शक दीर्घ में बैठकर सदन की कार्यवाही देगी। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित अन्य महिलाओं ने भी सदन की कार्यवाही देखी। मिस इंडिया छत्तीसगढ़ अनुष्का सोन ने सदन की कार्यवाही देखी।
सत्र की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए शासकीय संकल्प लाने पर सवाल उठाए। इसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन ङ्क्षसह ने खारिज कर दिया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा, उन्होंने भी महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण के लिए वर्तमान स्थिति में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का अशासकीय संकल्प पेश किया है। इसे विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि विशेष सत्र का विषय पहले से तय रहता है। मुख्यमंत्री ने शासकीय संकल्प की सूचना दे दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि विशेष सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ ङ्क्षनदा प्रस्ताव लाया जाएगा। सदन में जब कार्यवाही की शुरुआत हुई, तो नेता प्रतिपक्ष ने यह मुद्दा उठाया। विधायक चंद्राकर ने कहा, बाहर कही गई बातों पर सदन के भीतर चर्चा नहीं हो सकती है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस पर सहमति जताई।
सत्र के दौरान जब पूर्व मंत्री अनिला भेडिय़ा अपनी बात कह रही थी, उसी समय पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर अपनी बात रखना चाह रहे थे। उन्होंने पूर्व मंत्री को जिस अंदाज में कहा, उसे लेकर सदन में विपक्ष के सदस्यों ने तत्काल अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद इस वाक्या का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसे महिला सम्मान से जोडक़र पेश किया जा रहा है।
सत्र के दौरान टीका-टिप्पणी का दौर भी चला। शुरुआत में विधायक धर्मजीत ने नेता प्रतिपक्ष से कहा, बहानेबाजी बनाकर भागना नहीं। आपके लोग चरणदास महंत को रणछोड़ दास बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस पर महंत ने कहा, रणछोड़ दास भगवान कृष्ण का एक नाम है। हम इसका स्वागत करते हैं।
महिलाओं की भागीदारी व प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के विकास के लिए जरूरी: मुख्यमंत्री
विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को सदन में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तीकरण के लिए संसद और देश की सभी विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए शासकीय संकल्प पेश पर सत्तापक्ष और विपक्ष के 25 सदस्यों ने करीब 10 घंटे तक चर्चा की। लोकसभा में बिल के पास नहीं होने पर सत्तापक्ष ने जहां कांग्रेस पर जमकर आरोप लगाते हुए नारी शक्ति का अपमान बताया।
वहीं, विपक्ष ने भाजपा पर ही आरोप लगाते हुए कहा, महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है। उसे तत्काल लागू किया जाए। परिसीमन का पेंच फंसाकर बिल लाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, जनप्रतिनिधियों के कार्यक्षेत्र के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्थागत सुधार और संतुलन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनसरोकारों के अनुरूप बन सके।
मुख्यमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तीकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है।
नेता प्रतिपक्ष बोले- यह एक गैर जरूरी विशेष सत्र, भाजपा अपनी संसदीय हार बर्दाश्त नहीं कर पा रही: नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि मैं न तो प्रस्ताव के विरोध में हूं और न ही महिला आरक्षण के विरोध में हूं। मैं उस राजनीतिक प्रवृत्ति के खिलाफ हूं, जिसे परोसा जा रहा है। हमने तो यही सुना था कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि विशेष सत्र में ङ्क्षनदा प्रस्ताव लाया जा रहा है।
मंत्रियों ने भी जोर-शोर से कहा था कि ङ्क्षनदा प्रस्ताव लाएंगे, लेकिन सदन पहुंचने के बाद पता चला कि परिसीमन प्रकिया को जल्द पूरी कर आरक्षण लागू किया जाए इस पर प्रस्ताव लाया गया है, लेकिन इस विषय पर सत्र बुलाने की कोई आवश्यकता थी क्या ? यह एक गैर जरूरी विशेष सत्र है। इसका कहीं कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि यहां प्रस्ताव पास होने का संसद में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कहा कि आपकी नीयत साफ है तो क्रांतिकारी कदम उठाएं। अपनी सरकार में ही भाजपा महिला विधायकों को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देकर मंत्रिमंडल में शामिल कर दीजिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन के विधायकों को मैं कुछ याद दिलाना चाहता हूं। भाजपा इस अधिनियम को नारी शक्ति के नाम पर इवेंट बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस ने नारी शक्ति शक्ति को अधिकार दिए हैं। आप गैलरी में महिलाओं को बिठा कर नारी अधिकार की बात करते हैं।
Published on:
01 May 2026 09:10 am
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