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पति व ससुराल वालों को सजा दिलाने पत्नी सुप्रीम कोर्ट तक गई, हाईकोर्ट ने माना- मानसिक क्रूरता

पति और परिजन को सजा दिलाने महिला ने सुप्रीम कोर्ट तक याचिका दायर की थी। पत्नी ने पति, उसके भाई एवं मां को दहेज प्रताड़ना के आरोप में फंसाकर जेल भिजवाने की हर संभव कोशिश की।
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रायपुर

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Love Sonkar

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Updated: 15 Feb 2026, 12:11 AM IST

CG High Court: कांस्टेबल भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, फिजिकल टेस्ट के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Photo Patrika)

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार के खिलाफ झूठी, निराधार और आपत्तिजनक शिकायत को दुर्भावनापूर्ण और मानसिक क्रूरता माना है। कोर्ट ने पति को तलाक का हकदार मानते हुए उनके मध्य हुए विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया है। पति और परिजन को सजा दिलाने महिला ने सुप्रीम कोर्ट तक याचिका दायर की थी। पत्नी ने पति, उसके भाई एवं मां को दहेज प्रताड़ना के आरोप में फंसाकर जेल भिजवाने की हर संभव कोशिश की। इसके तहत पति और परिजन के दोषमुक्त होने के खिलाफ उन्हें जेल भेजने ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील प्रस्तुत की।

सुप्रीम कोर्ट द्बारा निर्धारित कानून के सिद्धांतों के अनुसार हाईकोर्ट ने माना कि यह पति को हर तरह से प्रताड़ित करने का प्रयास था। पति ने क्रूरता के आधार पर धमतरी परिवार न्यायालय में आवेदन किया। परिवार न्यायालय ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस संजय के.अग्रवाल एवं जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डीबी में अपील पर सुनवाई हुई। डीबी ने पति की अपील को स्वीकार कर क्रूरता के आधार पर उसे तलाक का हकदार माना।

कोर्ट ने आदेश में कहा पत्नी का अपनी सास के खिलाफ निराधार, अशोभनीय और मानहानिकारक आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करना, पति और उसके माता-पिता के बरी होने पर सवाल उठाते हुए अपील दायर करना, यह सब दिखाता है कि उसने यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया कि पति और उसके माता-पिता को जेल हो जाए और उसे उसकी नौकरी से निकाल दिया जाए।धमतरी की महिला का 2009 में हुआ था विवाहधमतरी निवासी महिला का 28 अप्रैल 2009 को हिन्दू रीति से विवाह हुआ। शादी के बाद दिसंबर 2010 में पहली संतान और अप्रैल 2014 में दूसरी संतान का जन्म हुआ। अप्रैल 2017 में पत्नी ने पति उसके भाई एवं मां के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 498 ए के तहत सभी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने सुनवाई उपरांत पति व उसके परिवार के सदस्यों को आईपीसी की धारा 498 ए से बरी किया। इसके खिलाफ पत्नी ने पति व उसके भाई व मां के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। अपील खारिज होने पर उसने सुप्रीम कोर्ट में भी एसएलपी प्रस्तुत की थी।