
एक माह गर्म पानी पीकर तीन ने रखा व्रत
Raipur News: रायपुर। इस सावन रायपुर में तपस्याओं की झड़ी लग गई है। टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में तीन ऐसे तपस्वियों का सम्मान किया गया। जिन्होंने लगातार एक महीने तक उपवास रखा। वह भी केवल गर्म पानी पीकर। इनके सम्मान में मंगलवार को गुणानुवाद सभा रखी गई थी।
जल्द ही यहां और भी बड़ी तपस्याएं होने वाली हैं। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया, उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि म.सा. की निश्रा में 10 से 17 अगस्त के बीच अट्ठाई की तपस्या होगी। इसमें 1008 तपस्वी शामिल होंगे। रायपुर के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि मासखमण यानी एक माह की तपस्या करने वालों में विजय संचेती, विनय पटवा और चांदनी जैन शामिल हैं। मंगलवार को गुरुदेव की मौजूदगी में सकल जैन समाज ने उनका अभिनंदन किया। 10 अगस्त से होने जा रही अट्ठाई ऐतिहासिक रहेगी। तपस्या के समापन पर गुणानुवाद सभा और आनंद महोत्सव का आयोजन ललित महल में किया जाएगा।
परिवार ऐसा बनाओ कि घर जाने पर चेहरा खिल उठे: प्रवीण ऋषि
प्रवचन सभा में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा, लोग बाहर हंसते-मुस्कुराते घूमते हैं। घर के अंदर प्रवेश किया नहीं कि चेहरे पर 12 बज जाते हैं। मुस्कान उड़ जाती है। बोलती बंद हो जाती है। परिवार ऐसा बनाओ कि बाहर भले कितनी भी परेशानी हो, घर जाने पर मन आनंदित हो उठे। तपस्या भी उन्हीं की पूरी होती है, जिनके चेहरे पर मुस्कान होती है। जिनके मन में प्रसन्नता नहीं है, उनकी तपस्या कभी पूरी नहीं हो सकती।
व्यर्थ और अनर्थ से मुक्त होना है तो पच्चखाण करना होगा। इसलिए जीवन में पच्चखाण जरूर करें। पच्चखाण कर लेने से भूत, भविष्य और वर्तमान के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। जो व्यक्ति पच्चखाण नहीं करता, वह अतीत के पाप कर्मों का दुख तो भोगता ही है। वर्तमान में जो पाप नहीं किए हैं और भविष्य में भी नहीं करेंगे, उसकी सजा भी भुगतनी पड़ती है।
कर्म के बंधन से बचना है तो परिणामों को देखिए, कुचक्र टूट जाएगा
एमजी रोड के जैन दादाबाड़ी में चल रहे प्रवचन में नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा ने कहा कि कर्मों का बंधन होता रहेगा। इससे मुक्त होना है तो परिणामों की ओर देखिए। कोई कितना भी धनवान हो या निर्धन। सबके जीवन में परेशानियां हैं। अगर बड़ी मेहनत से कामयाबी पाई, संपत्ति जुटाई तो वह भी किस काम की। आखिरकार एक दिन ये सब यहीं छोड़कर चले जाना है।
जन्म-मरण का ये चक्र निरंतर चलता रहेगा। इस कुचक्र से मुक्त होना है तो परिणामों की ओर गौर करिए। आपने क्या हासिल किया। मोक्ष को जाएंगे तो जन्म-मरण के इस बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाएंगे। हम कर्म को अलग से आटे की तरह सान कर नहीं बांधते हैं। जीवन में हम घर पर यह देख नहीं सकते कि कब कौन सा कर्म बांधते जा रहा है। हमें परिणाम खुद देखते हुए चलना है और यह विचार करना है कि हम कब तक इस कर्मचक्र में चलते रहेंगे।
Published on:
02 Aug 2023 11:52 am
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