
बस्तर से लौटे अफसरों को मिली मनचाही जिम्मेदारी (photo source- Patrika)
Police Transfer List: छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने यह साफ संकेत दिया है कि बस्तर को लेकर सरकार और पुलिस विभाग की सोच तेजी से बदल रही है। एक समय ऐसा था जब बस्तर में तबादला अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सजा की तरह माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। गृह विभाग की ओर से जारी तबादला सूची में बस्तर को 'प्राइम पोस्टिंग' के रूप में देखा जा रहा है।
नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवाएं देने वाले कई अधिकारियों को उनकी पसंद के अनुसार नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। राज्य सरकार ने सोमवार को राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के कैडर में बड़ा फेरबदल करते हुए 36 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) और 92 उप पुलिस अधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस सूची में सिर्फ स्थानांतरण ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग की बदलती कार्यशैली और भविष्य की रणनीति की भी झलक दिखाई देती है।
कुछ साल पहले तक बस्तर में नक्सली हिंसा के कारण यहां तबादला होना अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता था। कई लोग इसे दंडात्मक पोस्टिंग के रूप में देखते थे। लेकिन अब सुरक्षा हालात में सुधार और नक्सल गतिविधियों में कमी के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। सूत्रों के अनुसार इस बार कई अधिकारियों ने स्वयं बस्तर में पदस्थापना की इच्छा जताई थी। विभाग ने उनकी पसंद को भी महत्व दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अब बस्तर में कानून-व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है और सामान्य अपराध भी कम हैं। यही वजह है कि यह क्षेत्र अब पुलिस अधिकारियों के लिए करियर की महत्वपूर्ण पोस्टिंग के रूप में उभर रहा है।
तबादला सूची में शामिल अधिकारियों पर नजर डालें तो बस्तर में लंबे समय तक तैनात रहे 10 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 26 डीएसपी को मैदानी और शहरी क्षेत्रों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें अधिकांश अधिकारी तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य कर चुके हैं। विभाग ने इन अधिकारियों की पसंद का भी ध्यान रखा और उन्हें मनचाहे स्थानों पर पदस्थापना दी। इसे नक्सल मोर्चे पर लंबे समय तक सेवाएं देने वाले अधिकारियों के लिए एक तरह के सम्मान और प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।
इस तबादला आदेश की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि लंबे समय से एसपी रैंक का वेतन और ग्रेड-पे प्राप्त कर रहे, लेकिन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत कई वरिष्ठ अधिकारियों को पहली बार स्वतंत्र जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) की विभिन्न बटालियनों का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे भविष्य में पुलिस अधीक्षक (SP) या समकक्ष पदों पर पदस्थापना की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रशासनिक फेरबदल का असर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) पर भी पड़ा है। यहां पदस्थ प्रशांत खाण्डे, लोकेश देवांगन और सुरेश ध्रुव का तबादला कर दिया गया है। हालांकि फिलहाल इन पदों पर किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है। स्थानांतरित अधिकारियों में सुरेश ध्रुव को रायपुर नगर पुलिस में डीसीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस बार की स्थानांतरण सूची सिर्फ अधिकारियों के तबादले तक सीमित नहीं है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि सरकार अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले अधिकारियों को बेहतर अवसर देने की नीति पर काम कर रही है। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को स्वतंत्र जिम्मेदारी देकर भविष्य के नेतृत्व के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
पुलिस विभाग की इस नई तबादला नीति से यह स्पष्ट है कि बस्तर अब केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। सुरक्षा हालात में सुधार और प्रशासनिक बदलावों के चलते यह क्षेत्र अब पुलिस अधिकारियों के लिए चुनौती के साथ-साथ प्रतिष्ठित पोस्टिंग के रूप में भी उभर रहा है। वहीं, लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में सेवाएं देने वाले अधिकारियों को उनकी पसंद के अनुसार नई जिम्मेदारियां देकर सरकार ने उनके अनुभव और योगदान को भी महत्व दिया है।
Updated on:
21 Jul 2026 12:55 pm
Published on:
21 Jul 2026 12:54 pm
