
सूर्यप्रताप सिंह @रायपुर. अगर हम माओवादियों की बात करें तो वे किसी मेजर कारणों से हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। वह किसी को बेवजह नुकसान नहीं पहुंचाते। इसलिए मेरे मन में छत्तीसगढ़ को लेकर कोई भी डर नहीं था। यहां आने के बाद मुझे लगा कि यहां के लोग काफी अच्छे और सुलझे हुए हैं। ये कहना है टीवी एक्ट्रेस और इंडियन आइडल फेम नेहा सरगम का।
नेहा ने ‘चांद छुपा बादल में’ सीरियल से टीवी इंडस्ट्री में कदम रखा उसके बाद ‘डोली अरमानों की’ और 2012 में धारावाहिक ‘रामायण’ में सीता का किरदार निभाकर घर-घर में पॉपुलर हो गईं। वे 94 एफएम तडक़ा के एक कार्यक्रम को अटेंड करने रायपुर पहुंचीं जहां उन्होंने ‘पत्रिका प्लस’ से कास्टिंग काउच और माओवाद पर खुलकर बातें की।
नेहा से जब टीवी इंडस्ट्री में नेपोटिजम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हर फील्ड में इसका चलन है। इसे मैं गलत नहीं समझती अगर किसी को अपने फैमिली वर्क को करने में सहज महसूस होता है तो यह गलत नहीं है। मेरा मानना है कि टीवी इंडस्ट्री एेसी जगह है जहां खुद को ऑडियंस के सामने रहने पड़ता है। अगर आपमें हुनर और एक्टिंग नहीं है तो नेपोटिजम नहीं चलेगा।
डोली अरमानों की नाटक में मैने दीया का किरदार निभाया था जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था। इसमें दीया एक रिर्पोटर रहती है जिसका रेप हो जाता है। उस किरदार को करते वक्त मैं सहम सी गई थी। वाकई उस लडक़ी की हंसती खेलती दुनियां खत्म हो जाती है जो दरिंदगी का शिकार हो जाती है। इसके अलावा मेरे हर कैरेक्टर से कोई न कोई यादें जुड़ी हैं।
शायद होती होगी कॉस्टिंग काउच
शायद, इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच होती होगी, लेकिन मुझे इंडस्ट्री में आठ साल कंपलीट हो गए तो एेसा कभी नहीं हुआ कि मुझे इन चीजों का सामना करना पड़े। मैं भी एक छोटे शहर से बिलांग करती हूं। इसका मतलब ये नहीं है कि कास्टिंग काउच नहीं होती हर फील्ड में कई तरह के लोग है जिनकी मानसिकता अलग होती है। मेरा मानना है जो कम समय में सक्सेस पाने की चाह रखता है वहीं इन चीजों का शिकार होता है।
छत्तीसगढ़ की बात करें तो मैं यहां पहली बार आई हूं तो अभी तक मैंने जो देखा तो लगा कि यहां के लोग काफी मिलनसार है। यहां के बारे में पढ़ा है तो माओवाद एक अलग समस्या है मेरा मानना है कि किसी मेजर कारणों की तरह से लोग हिंसा का रास्ता अपनाते हैं। फिर हर स्टेट की एक अलग कहानी है।
जब आप किसी सरियल में काम करते हैं तो नार्मल महिला का किरदार फॉलो करना बड़ा टफ रहता है क्योंकि उसमें एेसी चीजों को दिखाना पड़ता है जो लोगों की जिंदगी में घटित हुई हो। इसके साथ ही फीलिंग्स का भी सम्मान करना पड़ता है। एेतिहासिक धारावाहिक भी टफ रहते हैं, लेकिन उनकी कहानी पता होती है तो प्ले करने में असहज नहीं होता।
Updated on:
01 Apr 2018 04:32 pm
Published on:
01 Apr 2018 04:26 pm
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