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हर दिन जान ले रहीं ‘मौत की खदानें

सड़कों के निर्माण के लिए मुरम और मिट्टी की जरूरत पूरी करने के लिए जिलेभर में जगह-जगह खोदी गई मौत की खदानें बारिश होते ही जानलेवा साबित होने लगी हैं।
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Occupation and hawala money in the mines of Banda Shahgarh

Occupation and hawala money in the mines of Banda Shahgarh

रायसेन. शासन व संबंधित विभागों द्वारा रोड निर्माण का टेंडर दिया जाता है। पर इसके बाद ठेकेदार किस तरह काम कर रहा है, सामग्री कैसी और कहां से इस्तेमाल कर रहा है, गुणवत्ता कैसी है, इस विषय पर मॉनिटिरिंग नहीं की जाती। इसका नतीजा ये होता है कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से चालू काम करते हैं और इसका दुष्परिणाम आमजन को भोगना पड़ता है। इसका उदहरण है कि सड़कों के निर्माण के लिए मुरम और मिट्टी की जरूरत पूरी करने के लिए जिलेभर में जगह-जगह खोदी गई मौत की खदानें बारिश होते ही जानलेवा साबित होने लगी हैं। बीते आठ दिनों में चार हादसों में चार बच्चों की जान ऐसी खदान और कुओं ने ले ली है।

मगर प्रशासन और खनिज विभाग कार्रवाई के नाम पर कुछ करने की स्थिति में नहीं है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार को नोटिस देने या फिर पैनॉल्टी लगाने से ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। अब सवाल ये खड़ा होता है कि ऐसी मौत की खदानें तैयार करते वक्त जिम्मेदार कहां थे। अवैध या वैध रूप से खोदी गई खदानों को खोदते समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि लगभग सभी खदानें तय मापदंडों से अधिक खोदी गई हैं, वैध हैं तो लीज से बाहर आकर खुदाई की गई है।

इससे तो यही समझ में आता है कि जिले के अधिकारियों को इन सब नियम कानूनों से सरोकार नहीं है, बल्कि कार्रवाई के नाम पर ही नियम याद आते हैं।
पूरे जिले में हैं खदानें
जमीन हो या पानी, जिले में कई मौत की खदानें बनी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सड़कों के निर्माण के लिए जगह-जगह खुदाई की गई है। वहीं नर्मदा नदी सहित अन्य नदियों से रेत निकालने के लिए खुदाई कर खदानें बना दी गई हैं। दोनों ही जगह ये खदानें पानी भरने के बार जानलेवा साबित होती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के किनारे अधिकतर खदानें हैं, ताकि ठेकेदार को मुरम या मिट्टी ढुलाई में आसानी हो। इन्हीं सड़कों से स्कूली बच्चों का आना जाना होता है, जो हादसों का शिकार हो रहे हैं। बेगमगंज के पास स्कूल से लौटते हुए ही दो बच्चों की खदान में भरे पानी में डूृबने से मौत हुई थी। ऐसा ही हादसा गैरतगंज के पास हुआ था।
हद से ज्यादा की खुदाई
कहते हैं, ठेकेदारों द्वारा हद से ज्यादा खुदाई की जाती है। माइनिंग विभाग से अस्थाई अनुमति लेकर वैध तरीके से अवैध उत्खनन किया जाता है। जिसे देखने या अधिक खुदाई होने पर रोक लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग मौके पर नहीं जाता।

शिकायत भी हो तो कागजों में ही औपचारिक जांच कर खात्मा कर दिया जाता है।
अस्थाई अनुमति देते हैं
सड़क निर्माण के लिए ठेकेदार को जरूरी मिट्टी या मुरम के लिए खदान की अस्थाई अनुमति दी जाती है, जिसमें लीज के मुताबिक गहराई और चौड़ाई में खुदाई की अनुमति होती है। खुदाई के बाद खदान की चारों ओर से फेंसिंग कराने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। जिसकी शर्त एग्रीमेंट में होती है, लेकिन आज तक किसी ठेकेदार ने इस शर्त का पालन नहीं किया और न ही अधिकारियों ने पालन कराने की जहमत उठाई।

ये हुए ताजा हादसे

ठ्ठ २६ जून को दोस्तों के साथ नहाने गया ग्राम पाली निवासी १२ वर्षीय अनिल पाल खदान में भरे पानी में डूब गया, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
ठ्ठ २७ जून को गैरतगंज के ग्राम देवरीगंज में दो बच्चों की खुले कुएं में नहाने के दौरान डूबने से मौत हो गई थी। इस कुएं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे।
ठ्ठ दो जुलाई को बेगमगंज थाना क्षेत्र के ग्राम विनायकपुर के पास ठेकेदारों द्वारा अवैध उत्खनन से बनाई गई खदान में भरे पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। बच्चे स्कूल से अपने घर वापस लौटे रहे थे, तभी उक्त हादसा हुआ था।

ठ्ठ इसी माह तीन जुलाई को गैरतगंज में ही मंडी के पास एक खदान के धंसने से मिट्टी में दबकर एक १३ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि चार लोग गंभीर घायल हुए।
&ठेकेदार को खदान की अनुमति देते समय एग्रीमेंट किया जाता है, जिसमें खुदाई के बाद खदान के चारों ओर फेंसिंग कराने की शर्त शामिल होती है। इसका पालन नहीं करने पर नोटिस देकर पैनॉल्टी लगा सकते हैं। कोई और कार्रवाई करने का नियम नहीं है। सभी ठेकेदारों को खदानों को सुरक्षित करने के निर्देश दिए जाएंगे।
धनराज कोटोलकर, जिला माइनिंग अधिकारी