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ये है पर्यावरण प्रेमियों की ‘लंका’, जंगल की तरह घर के आसपास लगाए पेड़

पांच परिवारों ने बसाया टोला..जंगल की तरह पेड़ों के बीच बनाए घर...नहीं होती कोई बीमारी..

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रायसेन. रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत पांच परिवारों का एक छोटा गांव है। ग्राम तामोट के वार्ड एक में शामिल यह गांव पर्यावरण के प्रति प्रेम और सुरक्षा का संदेश देता है। 50 साल से ये परिवार इस गांव में रह रहे हैं और इस दौरान इन परिवारों में किसी को कोई बड़ी बीमारी नहीं हुई। कोरोना संक्रमण के दौर में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि इस गांव के रहवासी कभी किसी तरह के संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। ग्रामीणों का भरोसा उस हरियाली पर है जो इन्होंने यहां तैयार की है। लगभग पांच सौ वृक्षों के बीच बसे परिवार कोरोना संक्रमण से भी बचे रहे हैं। पेड़ों की हरियाली के बीच नदी के किनारे रहने वाले ये लोग सब्जी की खेती कर जीवनयापन करते हैं।

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टापू नुमा गांव को नाम दिया गया 'लंका'
टापू नुमा इस गांव को नदी ने चारों ओर से घेरा है। बारिश में यहां पानी ही पानी दिखाई देता है, इसलिए लोगों ने इसे लंका नाम दे दिया।लंका के निवासी कमल सिंह कुशवाहा का कहना है कि लगभग 50 साल पहले उन्होंने यहां मकान बनाए थे। बारिश में जब कभी बाढ़ की स्थिति बनती है तो इन्हे परेशानी होती है, लेकिन प्रकृति के बीच रहने के आदी हो गए हैं। बुजुर्ग लक्ष्मी बाई का कहना है कि हरियाली से ही खुशहाली आती है। हम यहां खुश हैं, कभी बीमार नहीं होते। पेड़ों की छांव में भीषण गरमी का भी अहसास नहीं होता।गांव के युवा विनोद कुशवाहा का कहना है कि हमारे बुजुर्गों ने यहीं रहना पसंद किया अब हमें भी यहीं अच्छा लगता है। तामोट जाने के लिए नदी पर पकड़ी का छोटा पुल बना लिया है और इसी पुल से होकर यहां रहने वाले लोग नदी पार करते हैं।

इनका कहना है
लंका गांव तामोट पंचायत में आता है, इस गांव के लोगों का पर्यावरण के प्रति लगाव गजब का है। हालांकि बारिश में जब बाढ़ की स्थिति बनती है, तब इन लोगों को बाहर निकालना पड़ता है।
निकिता तिवारी, तहसीलदार गौहरगंज

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