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टीचर का कमाल- नहीं है मोबाइल नेटवर्क लेकिन फिर भी लग रही ‘स्मार्ट क्लास’

कोरोना काल में स्कूल बंद फिर बच्चों की लगातार चल रही पढ़ाई, टीचर ने खोजी राह सोशल डिस्टेंस के साथ दे रहे आदिवासी गांव में टीचर ने जगाई शिक्षा की अलख..

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रायसेन. कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल नहीं खुलने पर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की व्यवस्था शिक्षा विभाग ने लागू की है। जिसके लिए हर बच्चे के पास एंड्रॉयड मोबाइल होना जरूरी है, साथ ही वह जिस गांव में रहता है, वहां मोबाइल नेटवर्क होना भी जरूरी है। लेकिन जिले के ऐसे हजारों बच्चे ऐसे हैं, जिनके पास या तो मोबाइल नहीं है या उनके गांव में नेटवर्क नहीं मिलता है। ऐसे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। बाबजूद इसके यदि शिक्षक चाहे तो इस संकट में राह निकल सकती है। यह साबित किया है बाड़ी ब्लॉक के आदिवासी ग्राम शालेगढ़ की प्राथमिक शाला के शिक्षक नीरज सक्सेना ने।

गांव के घरों में खोल दीं पांच 'पाठशाला'
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए टीचर नीरज सक्सेना ने गांव के ही पांच घरों में पाठशालाएं खोल दी हैं। घर दहलान पर बच्चों को वो खुद जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षक नीरज सक्सेना बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव के युवाओं का सहयोग भी ले रहे हैं, जो युवक अपनी पढ़ाई कर चुके हैं उन्हें शिक्षक नीरज अपनी तरफ से पांच सौ से लेकर एक हजार रुपए तक मासिक वेतन भी दे रहे हैं और वो युवा भी बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने वाली कॉलेज स्टूडेंट नीतू धुर्वे ने बताया कि अभी हमारे कॉलेज की क्लास नहीं लग रही हैं। सक्सेना सर ने बच्चों को पढ़ाने के लिए कहा, इसलिए हम हर दिन बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जिसके लिए सर हमे में एक हजार रुपए प्रतिमाह देते हैं। यह अच्छा अनुभव है।

कई किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं पढ़ाने
जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर घने जंगल में पहाड़ों के बीच बसे आदिवासी भील गांव शालेगढ़ में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से यहां डिजिटल क्लास नहीं लग पा रही हैं। यहां की प्राथमिक शाला में 98 बच्चे दर्ज हैं। जिनको पढ़ाने के लिए सक्सेना ने गांव के लोगों से बात कर बड़े घरों की दालानों में कक्षाएं लगाना शुरू किया है। बच्चों की पढ़ाई न रुके इसलिए सक्सेना खुद हर दिन कई किमी पैदल चलकर गांव तक पहुंचते हैं।

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इस्पात मंत्रालय ने चुना है ब्रांड एंबेसडर
शिक्षक नीरज सक्सेना की अध्यापन के प्रति लगन और मजबूत इच्छाशक्ति को देखते हुए इस्पात मंत्रालय ने उन्हे विभाग का ब्रांड एंबेसडर चुना है। हालांकि इसकी अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उनका चयन हो चुका है। कोरोना संक्रमण काल खत्म होने के बाद इसकी घोषणा की जाएगी। इतना ही नहीं गांव के स्कूल की सूरत भी शिक्षक नीरज ने अपनी लगन से बदल कर रख दी है।

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