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कड़ाके की ठंड में हार्ट और लकवा के मरीजों पर अटैक, आप भी रहें बचकर

कड़ाके की ठंड के चलते जिला अस्पताल में बढ़े मरीज, हृदय पर घात कर रही ठंड, लकवा के मरीज भी बढ़े

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रायसेन। कड़ाके की ठंड में सर्दी जुकाम होना आम बात है, लेकिन जब पारा ज्यादा नीचे चला जाता है, तो इन आम बीमारियों के अलावा गंभीर बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। बीते एक सप्ताह में इसका असर दिखाई दिया है, जब तापमान में गिरावट शुरू हुई। असर यह रहा कि पहले जहां हार्टअटैक या लकवा के सप्ताह में एक या दो मरीज ही अस्पताल पहुंचते थे, वहीं अब हर दिन इन जानलेवा बीमारियों का शिकार होकर मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इसका कारण तापमान में गिरावट को मान रहे हैं। कड़ाके की ठंड में ऐसा होता है। ऐसे में सावधानी बरतना ही एक मात्र उपाय है। जो पहले से बीमार हैं, शरीर से कमजोर हैं, बुजुर्ग हैं, उनको इस ठंड में बेवजह घर से नहीं निकलना चाहिए। बच्चों का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इन दिनों हार्ट अटैक के साथ लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा ज्यादा रहता है।

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जाने ठंड में कैसे खतरा

जिला अस्पताल में मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. एमएल अहिरवार ने बताया कि सर्दी के मौसम में हमारे खून की नसें सिकुड़ने की वजह से दबाव बढ़ जाता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ने लगता है। बीपी बढ़ते ही हार्ट अटैक पड़ता है। सोते समय शरीर की गतिविधियां मंद हो जाती हैं। बीपी और शुगर का लेवल भी कम होता है। मगर उठने से पहले ही शरीर का ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम उसे सामान्य स्तर पर लाने का काम करता है। यह सिस्टम हर मौसम में काम करता है। मगर ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. सौरभ जैन ने बताया कि ठंड में नसें ज्यादा सिकुड़ जाती हैं। नसों को गर्म और एक्टिव करने के लिए ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में जिन्हें पहले से ही दिल की बीमारी है या जिन्हें पहले भी हार्ट अटैक हो चुका है, उनके लिए ज्यादा ठंड जानलेवा हो जाती है।

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इन बातों का रखें खयाल

सुबह जल्दी न उठें

जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक आ चुका है या जिनके दिल कमजोर है, वे ठंड के दिनों में बिस्तर जल्दी न छोड़ें। न ही जल्दी सैर पर जाएं। बाहर की अधिक सर्दी की वजह से शरीर को अपने आप को गर्म बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इससे दिल को ज्यादा काम करना पड़ेगा। जरूरी नहीं है तो सुबह शाम घर से नहीं निकलें। निकलना भी पड़े तो कान, नाक और सिर को गर्म कपड़े से ढंकें। पूरे शरीर पर गर्म कपड़े पहनें, ताकि शरीर के अंदर तक ठंडी हवा न पहुंचे।

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कम पानी पीयें

जिन्हें दिल की बीमारी होती है, उनके दिल को पम्प करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर आप बहुत ज्यादा पानी पी लेंगे तो हार्ट को पम्पिंग में और भी मेहनत करनी पड़ेगी, इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाएगा। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी पीयें।

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नमक कम खाएं

दिल के मरीजों को अपने खाने में नमक की मात्रा कम से कम लेनी चाहिए। नमक शरीर में पानी को रोकता है। पानी को रोकने का मतलब यही होगा कि शरीर में दिल को ज्यादा मात्रा में लिक्विड को पम्प करना होगा। नतीजा हार्ट अटैक के रूप में आ सकता है।