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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद घाटों पर लगा सामग्री का ढेर, नहीं हुई सफाई

विसर्जन के बाद घाटों पर पड़ा है कचरा....

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दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद घाटों पर लगा सामग्री का ढेर, नहीं हुई सफाई

रायसेन @शिवलाल यादव की रिपोर्ट....

पहले भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं और अब देवी जगदंबे की प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद जिले के पग्नेशवर स्थित बेतवा नदी घाट समेत रीछन नदी के तट मासेर रोड, दरगाह शरीफ पुल के नजदीक ,माखनी तालाब,जाखा पुल बेतवा नदी भोपाल रोड के दोनों घाटों के किनारे निर्माण सामग्री पड़ी हुई दिखाई दे रही है। यहीं पर पूजन सामग्री भी लावाारिस अवस्था में पड़ी नजर आ रही है।


लापरवाही का आलम है कि जिम्मेदारों द्वारा अभी तक इन नदियों व तालाब से कचरा व बांस लकडिय़ों को बाहर नहीं निकाला जा सका है। यही कारण है कि इन इ नदियों और माखनी के तालाब का पानी दूषित होता जा रहा है।


सनातन हिन्दु धर्म में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को नदी तालाबों में विसर्जन करने की परंपरा सदियों से कायम हैं ।इसी के तहत दशहरे के दिन शाम से लेकर देर रात तक इन नदियों तालाबों में देवी महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया ।

भगवान श्री गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद भी नगर पालिका ने सामग्री को बेतवा, रीछन नदी के घाटों और माखनी के तालाब से नहीं हटाया था। अभी भी यह सामग्री घाटों के किनारे पड़ी हुई है जिससे पानी दूषित होता जा रहा है।


बेतवा,रीछन नदियों व तालाबों का पानी साफ रहे। इसके लिए नपा अमले की तरफ से कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाते हैं। यही कारण है कि इस समय लबालब भरी इन नदियों का पानी खराब होता जा रहा है। श्रीगणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होना था तो कई गणेशोत्सव समितियों ने जबरन इन नदियों में विसर्जन किया था।

हालांकि जिला प्रशासन व नगरपालिका ने पग्नेश्वर के समीप एक जलकुंड बनाकर देवी दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की थी ।पता चला है कि प्रशासन ने प्रतिमा विसर्जन के नाम पर छोटा सा एक गड्ढा ही बनाया था। लेकिन जिन दुर्गा उत्सव समितियों को नदी पास में पड़ी तो उन्होंने प्रतिमाओं का पुरुष और महिला घाट पर विसर्जन किया था।


विसर्जन के बाद जो सामग्री निकली तो वह घाटों के किनारे पड़ी रही ।लेकिन उसके हटाया तक नहीं। इसके बाद अब दुर्गा देवी प्रतिमाओं का विसर्जन यहीं पर किया गया तो अधिकांश समितियों ने इन दोनों नदियों के घाट पर इनका विसर्जन किया।


इसके बाद फिर से अब निर्माण सामग्री नदी के घाटों पर दिखाई दे रही है। पूजन सामग्री भी बड़ी मात्रा में यहां पड़ी है। इसके बाद भी नगर पालिका के अमले ने इसकी सही तरीके से साफ-सफाई शुरू नहीं की है। इस कारण नदियों के घार पर रोजाना नहाने व कपड़ों की धुलाई करने आने वाले लोगो की समस्या बढऩे लगी है।

काई,जलकुंभी के कारण भी होती है समस्या...
हर साल हरी काई व जलकुंभी के कारण भी बेतवा रीछन नदी का पानी खराब होता है। इन दोनों नदियों में हर साल बड़ी मात्रा में हरी काई व जलकुंभी फैल जाती है।

यह बेतवा नदी के महिला पुरुष घाट पग् नेश् वर से लेकर स्टाप डैम के आगे कुण्ड व सूर्य कुंड में दिखाई देती है। इस हरी काई जलकुंभी से भी पानी दूषित होता है। इसे भी आज तक नहीं हटाया जा सका।

कमोवेश यही हालात रीछन नदी के बने हुए हैं।कई बार नगर पालिका के अमले ने प्रयास जरूर किए लेकिन इसमें सफ लता नहीं मिल सकी थी।