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जल्द शुरु होगा सांची स्तूप को ‘आइकॉनिक प्लेस’ बनाने का काम

-टीम ने भ्रमण कर देखा कहां से शुरू करें काम -दूसरी बैठक में तय हुए कुछ काम

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Sanchi Stupa

रायसेन। विशेष पर्यटन स्थलों को स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस बनाने की केंद्र की योजना में सांची को शामिल किया गया है। योजना के फेज-4 में शामिल सांची स्तूप को स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस बनाने की इस योजना पर जल्द काम शुरू होगा। इसके लिए पहली बैठक फरवरी में आयोजित की गई थी, बीते दिन कलेक्टर अरविंद कुमार दुबे की अध्यक्षता में हुई दूसरी बैठक से पहले नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की टीम ने सांची पहुंचकर स्तूप का भ्रमण भी किया। एनएमडीसी इस योजना के लिए राशि उपलब्ध कराएगा, जबकि तय कार्य मप्र पर्यटन विकास निगम से कराए जाएंगे।

बैठक में तय किया गया कि प्रारंभिक रूप से पहाड़ी के नीचे स्तूप प्रवेश द्वार से काम किया जाएगा। जिसमें प्रवेश द्वार को भव्य बनाया जाएगा, जो हाइवे से ही दिखाई दे। इसके अलावा प्रवेश मार्ग पर परंपरागत तथा भरतीय संस्कृति और सभ्यता से जुड़े सामानों की दुकानों के लिए जगह दी जाएगी। इसके अलावा स्तूप पर पार्किंग क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इन कार्यों में स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को आधार माना जाएगा। कलेक्टर दुबे ने स्तूप को साफ-सफाई के मॉडल के रूप में विकसित करने के संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही सांची स्तूप का हैरिटेज वॉक आयोजन के संबंध में भी चर्चा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक विकास कुमार शहवाल, डीएफओ अजय पाण्डेय, जिला पंचायत सीइओ पीसी शर्मा, एनआरएलएम से एम राजा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

इसलिए विशेष हैं सांची स्तूप

1. सांची में मौजूद स्तूप भारत में सबसे पुरानी पत्थर की संरचना है, जिसका निर्माण तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक मोर्य ने कराया था।

2. सांची के स्तूप 14वीं शताब्दी तक निर्जन हो गया था, क्योंकि इनके संरक्षण के लिए उस समय किसी भी शासक ने इस पर ध्यान नही दिया।

3. इन स्तूपों की खोज वर्ष 1818 में एक ब्रिटिश अधिकारी जनरल टेलर ने की थी।

4. जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन मार्शल को इसके पुनर्निर्माण का कार्यभार सौंपा था। वर्ष 19121919 तक इस स्तूप की संरचना कर इसे पुन: खड़ा किया गया।

5. यह स्तूप भारत के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है, जिसकी ऊंचाई लगभग 21.64 मीटर और व्यास 36.5 मीटर है।

6. 6. इस स्तूप के निकट सबसे प्रसिद्ध अशोक स्तंभ, जिसमें सारनाथ की तरह चार शेर शामिल हैं पाया गया है। साथ ही यहां बड़ी संया में ब्राह्मी लिपि के शिलालेख पाए गए हैं।

7. सर जॉन मार्शल ने वर्ष 1919 में इसे संरक्षित रखने के लिए एक पुरातात्विक संग्रहालय की स्थापना की, जिसे बाद में सांची पुरातत्व संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया।

8. सांची नामक स्थान का गौतम बुद्ध द्वारा कभी भी दौरा नहीं किया गया था, भले ही आज इस स्थान पर बौद्ध धर्म का अपना एक ऐतिहासिक महत्व हो।

9. इस स्तूप का निर्माण बौद्ध अध्ययन और बौद्ध शिक्षाओं को सिखाने के लिए किया गया था।

10. यूनेस्को ने सांची के स्तूप की संरचना और शिल्पकारिता को देखते हुए वर्ष 1989 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।