
कई युवाओं की भी मौत
ब्यावरा. राजगढ़ में दिल के दर्द का कोई उपचार नहीं है. यदि किसी को हृदय संबंधी बीमारी, तकलीफ होती है तो यहां प्राथमिक उपचार के अलावा उसे कुछ नहीं मिलता। पूरे जिले की आबादी इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों पर ही निर्भर है। करीब 200 किमी तक इलाज मुहैया नहीं होने से कई मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ चुके हैं.
दरअसल, सर्दी और अत्यधिक लू वाले समय में आमतौर पर डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि कॉर्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुक जाना) के मामले बढ़ेंगे, ऐसे में सावधानी जरूरी है। बीते कुछ सालों में इसके मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में भी हृदय संबंधी बीमारी के लिए जिले की पांच लाख से अधिक आबादी बड़े शहरों पर निर्भर है। राजगढ़ से लेकर जिले के आखिरी छोर तक कहीं कोई सुविधा इसके लिए नहीं है। 200 किलोमीटर इंदौर या 150 किलोमीटर भोपाल जाने पर ही उपचार मिल पाता है। वहीं कुछ लोग पड़ोसी जिलों का सहारा लेते हैं, जिनमें झालावाड़ (राजस्थान) आगर मालवा, शाजापुर और गुना शामिल है। बता दें कि आमतौर पर हृदय, कैंसर, त्वचा सहित अन्य बड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज जैसी जगह ही मिल पाते हैं।
मेडिकल कॉलेज खुलने से होगा लाभ
मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो जाएगा तो राजगढ़ जिले की जनता को काफी सुविधाएं मिलने लगेंगी। इनमें खासकर न्यूरोलॉजी, आंकोलॉजी (कैंसर), त्वचा रोग विभाग, कॉर्डियोलॉजी (हृदय रोग विभाग) सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर्स के साथ ही विभाग खुलेंगे, जिससे काफी मदद मरीजों को मिलने लगेंगी।
सर्दियों में केस ज्यादा, इस सीजन में 12 मौत
डॉक्टर्स की मानें तो कार्डियक अरेस्ट के मामले सर्दियों में बढ़ जाते हैं। ज्यादा खतरा बुजुर्ग, डायबिटिक, कोलेस्ट्राल वाले मरीजों के साथ ही हाई बीपी वाले मरीजों में रहता है, लेकिन बीते कुछ समय से देखा गया है कि कई युवा भी इसकी चपेट में आए हैं। ब्लड गाढ़ा होने की स्थिति में और अत्यधिक ठंड वहन कर लेने पर भी शरीर शिथिल पड़ जाता है। इसी सीजन में दर्जनभर (12) से अधिक लोगों की मौत हृदय गति रुक जाने से हो चुकी है, जिससे लोग दहशत में भी हैं।
जरूरी दवाइयों का भी टोटा
हृदय के साथ ही अन्य रूटीन बीमारियों के उपचार के भी जिले में लाले हैं। लंबे समय से मांग भेजने के बावजूद शासन स्तर पर जरूरी दवाइयों का इंतजाम नहीं हो पाया है। इससे दूर-दराज से इलाज करवाने पहुंचने वाले ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता है। जिला अस्पताल के साथ ही सिविल अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर जरूरत के हिसाब से दवाइयां उपलब्ध नहीं है।
कुछ पद स्वीकृत नहीं, कुछ विशेषज्ञ नहीं
इस संबंध में राजगढ़ के सीएमएचओ डॉ. दीपक पिप्पल बताते हैं कि कॉर्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट के पद मेडिकल कॉलेज लेवल पर स्वीकृत रहते हैं. बाकी जिनकी जरूरत है उनमें निश्चेतना अधिकारी का पद स्वीकृत है, लेकिन विशेषज्ञ नहीं है। हमने शासन को पत्र लिखा है। साथ ही बार-बार उन्हें अवगत भी करवा रहे हैं कि राजगढ़ जिले के लिए विशेषज्ञों की पूर्ति की जाए।
Published on:
14 Jan 2023 02:01 pm
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