
Jeerapur BMO reached the police station to complain to the former market president
जीरापुर. कहने को आशा कार्यकर्ता ग्रामीण अंचल में काम करने वाली छोटी सी कार्यकर्ता है, जो स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर ग्रामीण अंचल में काम करती है। लेकिन मानदेय के आधार पर काम करने वाली इन आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति में बड़े-बड़े लोग जुड़ जाते हैं और ऐसा हो भी क्यों न। क्योंकि यह पद सीधा जमीन स्तर से जुड़ा हुआ है। कई बार इनकी नियुक्ति विवादों का कारण तक बन जाती है। जैसा कि जीरापुर अस्पताल में मंगलवार को हुआ। जहां जैतपुरा गांव की एक आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति को लेकर बीएमओ विवेक दुबे और पूर्व मंडी अध्यक्ष फूलसिंह गुर्जर के बीच कहासुनी हुई और मामला थाने तक पहुंच गया।
घटना सुबह 11 बजे के लगभग की है। जब पूर्व मंडी अध्यक्ष गुर्जर जैतपुरा आशा कार्यकर्ता की नियुक्त को लेकर मंत्री से लिखा हुआ एक पत्र लेकर अस्पताल पहुंचे। यदि डॉ. दुबे की मानें तो उनके चैंबर में आकर फूलसिंह ने आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति का पत्र दिया। इसको लेकर उन्होंने इनकार करते हुए कहा कि इस नियुक्ति में हमारी भूमिका नहीं होती। यह सरपंच, सचिव के माध्यम से कराई जाती है। लेकिन वे बात मानने की जगह डंडा लेकर आ गए और गालीगलौज करने के साथ ही मेरे पेट में मारने लगे। आसपास खड़े लोगों ने बीच बचाव किया। यहां फूलसिंह का अलग तर्क है उनका कहना है कि बीएमओ के पास जब वे गए तो उन्होंने नियुक्ति को लेकर सरपंच सचिव से अनुमोदन कराने के साथ ही एक लाख रुपए की डिमांड की। जब मैंने मना किया तो बोले ऐसे नियुक्ति नहीं होती। जब इस बात की शिकायत जनप्रतिनिधियों से करने के लिए कहा तो वे भड़ककर उल्टा मेरी शिकायत करने पहुंच गए।
मुश्किल से दर्ज हुआ मामला
घटना के बाद दोनों पक्ष थाने पहुंच गए। लेकिन मामला दर्ज होने में लेटलतीफी हो रही थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के वाट्सऐप ग्रुप पर इस मामले की जानकारी देते हुए सहयोग मांगा गया। बाद में पुलिस ने बीएमओ विवेक गुप्ता की शिकायत पर फूलसिंह के खिलाफ धारा 294, 353, 506 और मप्र चिकित्सा से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई धारा 3/6 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया।
धरना दिया तो मिला कार्रवाई का आश्वासन
पूर्व मंडी अध्यक्ष फूलसिंह गुर्जर थाने में अपना आवेदन लेकर तीन घंटे तक घूमते रहे। लेकिन उनकी कोई सुनवाई थाने में नहीं हुई। इसके बाद तहसील कार्यालय के सामने वे अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। यहां उन्होंने अपनी ही सरकार की नीति को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार है, लेकिन डॉक्टर यहां मनमानी कर रहे हैं। मरीज परेशान होते रहते हैं। यहां उन्होंने कुछ वरिष्ठ कांग्रेसियों से चर्चा की। इसके बाद थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन देते हुए उनका धरना खत्म कराया।
Published on:
04 Dec 2019 04:04 am
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