
प्राइवेट स्कूलों की किताबें और ड्रेस नहीं खरीद पाते बच्चे, इसलिए फ्री में नहीं लेते एडमिशन
राजगढ. गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चे और उनके परिजन प्राइवेट स्कूलों की महंगी किताबें और डे्रस नहीं खरीद पाते हैं, इसी के साथ प्राइवेट स्कूलों में समय समय पर होने वाली विभिन्न गतिविधियों के नाम पर खर्च होने वाला पैसा देना भी उन बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता है, यही कारण है कि गरीब व कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए फ्री में एडमिशन लेना भी चुनौती साबित हो रहा है।
गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत बच्चों को प्रवेश दिलाया जा रहा है और इसमें बड़ी संख्या में बच्चे अपना प्रवेश भी ले रहे थे, लेकिन पिछले कुछ समय के सरकारी आंकड़ों को देखें तो अब गरीब बच्चों का इन स्कूलों से मोहभंग होने लगा है। इसका कारण यह नहीं कि बच्चे इन स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते, बल्कि बच्चों के अभिभावक महंगे स्कूलों की अन्य व्यवस्थाओं की पूर्ति करने में पीछे रह जाते हैं। यही कारण है कि कई बार स्कूल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों के सामने ना सिर्फ उन्हें नीचा देखना पड़ता है। बल्कि कई बार जूते, ड्रेस या पुस्तकों की वजह से क्लास के बाहर खड़े होकर भी पढ़ाई करनी पड़ती है। यही कारण है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
इसलिए खाली रह गई आरटीई की सीट
पिछले वर्षों में देखा गया है कि आरटीई में आवेदन करने वाले परिजनों की संख्या इतनी ज्यादा होती थी कि लॉटरी सिस्टम से बच्चों का चयन करना पड़ता था, लेकिन अब जो सीटें निर्धारित की गई है उसकी तुलना में 62 प्रतिशत बच्चों ने ही प्रवेश लिया है। प्रदेश में 2,78,587 सीटों की तुलना में 77000 से भी ज्यादा सीटें खाली रह गई। जिसमें किसी ने आवेदन ही नहीं किए। वहीं जो आवेदन हुए उनमें से भी करीब 30,000 परिजन आवेदन के बाद सत्यापन कराने ही नहीं पहुंचे।
फैक्ट फाइल
7822 राजगढ़ जिले में रिजर्व सीट
5801 कुल आवेदन
5018 आवेदनों का हुआ सत्यापन
783 परिजन सत्यापन ही नहीं करवाने आए
2804 खाली रह गई सीट
चयनित दुकानों पर मिलने वाला स्कूल का कोर्स, जिसमें किताब, कॉपी, पेंसिल, और अन्य खर्च।
हर दिन बच्चे के साथ टिफिन भेजना जरूरी।
स्कूल में चलने वाली सभी ड्रेस को मेंटेन करना, एक स्कूल में तीन-तीन ड्रेस चल रही है।
स्कूल और स्पोर्ट्स जूते अनिवार्य।
पानी के लिए थर्मस युक्त बॉटल।
बस का किराया या ऑटो का खर्च।
एनुअल फंक्शन या स्पोर्ट्स के आयोजन की ड्रेस और खर्च।
परीक्षा फीस और अन्य आयोजन में भाग लेता है तो खर्च।
नोट: इन सब पर आने वाला खर्च न्यूनतम 15,000 रुपए एक बच्चे का
आदेश बेअसर
5 मई को दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी माता-पिता को महंगी शैक्षिक सामग्री और यूनिफॉर्म किसी भी स्पेसिफिक वेंडर से खरीदने के लिए नहीं कह सकते। यदि ऐसा होता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। ये आदेश यहां भी जारी होते रहे लेकिन अमल नहीं हुआ।
आरटीई के तहत प्रदेश में प्रवेश की स्थिति
2,78,587 सीट प्रदेश के सभी उपलब्ध स्कूलों में आरटीई के तहत
2,02,304 इनके विपरीत आये आवेदन
1,73,742 आवेदनों का सत्यापन
जिले में हुए आरटीई से आवेदन की स्थिति
ब्लॉक कुल रिजर्व सीट आवेदन सत्यापन
ब्यावरा 1273 1038 852
खिलचीपुर 831 482 431
नरसिंहगढ़ 2036 1103 949
सारंगपुर 1788 615 524
जीरापुर 996 1942 1736
राजगढ़ 899 621 526
कुल 7822 5801 5018
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इस बार कई सीट खाली रह गई
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में ट्यूशन फीस और प्रवेश शुल्क माफ है, शेष व्यवस्थाएं बच्चों के अभिभावकों को ही करनी होती है। इस बार कई सीट आरटीई की खाली रह गई है।
-वीएस इंदोलिया, डीपीसी, राजगढ़
Published on:
15 Jul 2022 03:52 pm
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