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कलेक्टर साहब! यहां भी आकर देख लो, इस शहर के विकास को ग्रहण लग गया

-ब्यावरा की जनता का जिला प्रशासन को खुला आमंत्रण-जिला मुख्यालय पर रात-रातभर कार्रवाई करने वालीं कलेक्टर से शहरवासियों ने लगाई गुहार।

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कलेक्टर साहब! यहां भी आकर देख लो,  इस शहर के विकास को ग्रहण लग गया

कलेक्टर साहब! यहां भी आकर देख लो, इस शहर के विकास को ग्रहण लग गया

ब्यावरा से राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट
जिला मुख्यायल पर इन दिनों सख्त हुए जिला प्रशासन को लेकर तरह-तरह की चर्चा शहर सहित जिलेभर में हैं। रात-रातभर मॉनिटरिंग कर बेहतर काम के रिजल्ट को लेकर कलेक्टर डटी हुई हैं। इसी से प्रेरित होकर शहरवासियों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि साहब! हमारे यहां भी आकर देख लो, इस शहर के विकास को ग्रहण लग गया है। न यहां शासन स्तर के काम हो पा रहे हैं न यहां के जनप्रतिनिधि कुछ करना चाहते।

जनता से जुड़ी तमाम बुनियादी सुविधाओं के साथ ही वे तमाम रेगुलर और मामूली काम अटके पड़े हैं जो मायने रखते हैं। इन्हीं कलेक्टर द्वारा लिखित निर्देश दिए जाने के बावजूद डिवाइडर वाले रोड का बच्चा हुआ अतिक्रमण नहीं टूट पाया।

शहरवासियों को अब जिलाधीश से काफी उम्मीदें
वहीं, समूचे शहर में हर दिन लगने वाला जाम किसी से छिपा नहीं है जिलेभर में शहर के बिगड़ैल ट्रेफिक की चर्चा। नगर पालिका प्रबंधन ने मोटे कमीशन की आड़ में करीब 86 लाख रुपए के टै्रफिक सिंग्नल तो लगा दिए, लेकिन वे धूल खाने की स्थिति में है। दिखने में जरूर सिग्नल के कारण शहर इंदौर-भोपाल जैसा है लेकिन कमीशनखोर व्यवस्था की हकीकत कुछ और ही है। हर तरफ से निराश शहरवासियों को अब जिलाधीश से काफी उम्मीदें हैं।

न यहां के नेता रुचि दिखाते, न अधिकारी गंभीर
18 करोड रुपए का डिवाइडर वाला रोड उसी बदहाली से गुजर रहा है जिसे शहरवासी सालों से झेलते आए हैं। हालत यह है कि सुठालिया रोड, चूड़ी गली, मुख्य एबी रोड और राजगढ़ रोड सहित चंद प्राइम लोकेशन का अतिक्रमण तक नहीं हट पाया है। नगर पालिका प्रबंधन जरूर अखबारों की कटिंग्स ओर वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाने खुद के ही कर्मचारियों से फोटो खिंचवाकर ठेले, गुमटियों वालों पर सख्ती दिखाता है, लेकिन बड़े कब्जेधरियों से कोसों दूर है। दो साल पहले हुई कार्रवाई इतिहास बनकर रह गई, इसके बाद मानो तमाम बचे हुए काम को ही ग्रहण लग गया है।


पत्रिका व्यू: आखिर जहां जरूरत वहां क्यों ध्यान नहीं..?
सालों बाद ही सही लेकिन जिला मुख्यालय पर सख्त हुए जिला प्रशासन की सराहना की जा रही है, लेकिन वास्तव में क्या वहां इतनी जरूरत है इस पर विचार करना होगा। जरा सोचें इसी के समतुल्य जिले का सबसे बड़ा शहर ब्यावरा अतिक्रमण और बदहाल टै्रफिक त्रस्त है। यहां की जनता की सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लोग उम्मीद छोड़ चुके हैं ऐसे में सख्त कलेक्टर निधि निवेदिता को शहर की ओर भी ध्यान देना चाहिए ताकि सही मायने में प्रशासन की सख्ती का असर नजर आए।

जनता ने सीधे लगाई कलेक्टर से गुहार
कलेक्टर महोदय हमने कभी नहीं सुना कि राजगढ़ में जाम लगा हो, अतिक्रमण से फजीयत हुई हो, लेकिन हमारे यहां अतिक्रमण इस कदर हावी है कि रोज वाहन गुथमगुत्था होते हैं, जिस पर किसी का जोर नहीं चलता।
-प्रो. के.जी. जोशी, कर्मचारी कालौनी ब्यावरा।


हमारा अस्प्ताल रोड एक छोटा सा उदाहरण है, इसे नगर पालिका चार साल में बनवाना तो दूर ठीक भी नहीं करवा पाई। रोजाना यहां लोग फिसलकर गिरकर पड़ रहे हैं।
-शिशुपालसिहं राणा, सीनियर एडव्होकेट ब्यावरा।


जितना अतिक्रमण हटा उसके बाद प्रशासन ने चुप्पी साध ली। मानों शहर के विकास को ग्रहण लग गया हो। कोई इसे लेकर गम्भीर ही नहीं है।
-सुनील शिवहरे, समाजसेवी ब्यावरा।


ब्यावरा भी जरूर आऊंगी
स्वछता सर्वेक्षण 2020 और अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन सख्त हुआ है। हम स्टेप बाय स्टेप चल रहे हैं। ब्यावरा भी मैं जरूर आऊंगी, वहां बहुत से काम होना है। बिंदुवार समीक्षा के साथ ही मॉनिटरिंग के साथ काम होगा।
-निधि निवेदिता, कलेक्टर राजगढ़।