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नई बिल्डिंग में शिफ्ट हुई मैटरनिटी, स्टॉफ की कमी चुनौती

सर्वसुविधा युक्त लेबर रूम में होगी अब डिलिवरी, वैकल्पिक तौर पर चुनिंदा बेड ही अंदर के रूम में लगाए

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ब्यावरा। सात करोड़ की लागत से भले ही हाईटैक लेवल का सिविल अस्पताल दो प्रमुख हाईवे के ब्यावरा शहर में बन गया हो लेकिन स्टॉफ की कमी अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है। निर्माणाधीन बिल्डिंग में बन चुके हिस्से में बुधवार को वैकल्पिक तौर पर मैटरनिटी भी शिफ्ट की गई।

अब अत्याधुनिक बिल्डिंग के मैटरनिटी वार्ड, लेबर रूम में डिलिवरी होगी। साथ ही प्रसूताओं के लिए नई बिल्डिंग में ही कुछ बेड की व्यवस्था की गई है। बाकी वैकल्पिक व्यवस्था पुरानी बिल्डिंग में ही रहेगी। हालांकि नई जगह भले ही मैटरनिटी शिफ्ट हुई हो लेकिन कुछ दिन पुराने लेबर रूम में ही व्यवस्था करना होगी।

इमरजेंसी केसेस को हेंडल करने के लिए फिलहाल कुछ काम पुराने रूम में भी रहेगा। बता दें कि नई बिल्डिंग में एनआरसी, डिस्पेंसरी, लैब सहित अन्य विभाग पहले ही शिफ्ट किए जा चुके हैं। इसी को लेकर बुधवार को अस्पताल प्रभारी डॉ. एस. एस. गुप्ता और महिला चिकित्सक शैली गर्ग ने नये मैटरनिटी वार्ड का निरीक्षण किया और वैकल्पिक तौर इंतजाम करने की प्लॉनिंग की।

प्रतिदिन सात से आठ डिलीवरी
जिले के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में एक्सीडेंट, रूटीन चेकअप के साथ ही मौसमी बीमारियों के सर्वाधिक मरीज आते हैं। महिला चिकित्सक शैली गर्ग ने बताया कि अस्पताल में रोजाना करीब सात से आठ डिलीवरी होती है, ये नॉर्मल डिलीवरी का आंकड़ा है। इसके अलावा कुछ कॉम्प्लिकेटेड सहित अन्य तरह के रेफरल केसेस भी होते हैं। बता दें कि नीति आयोग के आंकड़े सुधारने संस्थागत प्रसव की संख्या भी अस्पताल प्रबंधन ने बढ़ाई है। हालांकि सीजर केसेस की संख्या में कोई इजाफा नहीं हो पाया है।

100 बेड का अस्पताल, स्टॉफ आधा भी नहीं
अत्याधुनिक तकनीक से बने 100 बेड के अस्पताल में जरूरत के हिसाब से आधा स्टॉफ भी नहीं है। डॉक्टर्स से लेकर सफाईकर्मियों तक स्टॉफ की कमी से जूझ रहे हैं। हाईटैक तरीके से बने अस्पताल को मैनेज करने के लिए पर्याप्त सफाईकर्मी नहीं है। साथ ही इतनी बड़ी बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड की भी कमी है।

विभागीय स्तर पर मांग किए जाने के बावजूद यहां संख्या नहीं बढ़ाई जाती। ऐसे में स्टॉफ की कमी के कारण नई बिल्डिंग में उच्च स्तर की सुविधाएं देना चुनौती पूर्ण लग रहा है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने मार्च-अप्रैल में कुछ नया स्टॉफ भेजने का दावा किया था लेकिन चुनिंदा स्टॉफ नर्सेस ही जिला चिकित्सालय में आकर रह गईं। बाकी अन्य अस्पतालों में समस्या अभी भी कायम है।


डिस्पेंसरी, एनआरसी, लैब के बाद अब मैटरनिटी को भी शिफ्ट किया है लेकिन स्टॉफ की कमी से थोड़ी दिक्कत आएगी। हमने शासन स्तर पर पैरामेडिकल स्टॉफ बढ़ाने की मांग की है। फिर भी हमारी कोशिश है कि शिफ्टिंग के साथ ही मरीजों की सुविधा का भी ध्यान रहे।
डॉ. एस. एस. गुप्ता, प्रभारी, सिविल अस्पताल, ब्यावरा