
गजब है एमपी पुलिसः 6 साल के मासूम पर दो धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज
ब्यावरा @राजेश कुमार विश्वकर्मा की रिपोर्ट...
थानों में police stations मारपीट, Beating गाली गलौज सहित धमकाने के केस इस कदर बढऩे लगे हैं कि पुलिस police register case बिना किसी जांच-पड़ताल के ही केस दर्ज कर देती है भले ही सामने वाले के साथ मारपीट या गाली गलौज न हुआ हो। सिटी पुलिस City Police की बड़ी लापरवाही negligence गुरुवार को सामने आई जिसमें मारपीट और गाली गलौज से जुड़े मामले में बिना जांच किए ही पुलिस ने एक छह साल के मासूम पर केस दर्ज कर डाला। अब पुलिस उसे अपनी गलती mistake मानकर बाल न्यायालय Child court में खात्मा करने की बात कह रही है।
दरअसल, 12 वर्ष तक के बच्चों के खिलाफ कोई भी आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके धारा-323 और 294 के तहत राजगढ़ जिले के एक गांव में 6 वर्षीय मासूम पर पुलिस ने केस दर्ज कर दिया।
ये है मामला
एक दिन पहले गांव के दो बच्चे खजूर तोडऩे गए थे। तभी वहां मासूम खजूर के लिए पत्थर फेंका तो वहीं पास में खड़े दूसरे मासूम को चोट लग गई। उसे परिजन थाने लेकर पहुंचे और उन्हीं की शिकायत पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया। बकायदा मासूम का मेडिकल करवाया गया और चोट के आधार पर केस दर्ज किया गया।
थाना प्रभारी से बात की
इसके बाद पुलिस आरोपी बना चुकी मासूम के पिता जब थाने पहुंचे तो वे परेशान हो गए। फिर वे पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और समाजसेवी रामचंद्र दांगी के पास पहुंचे। समाजसेवी रामचंद्र दांगी ने इस घटना की कड़ी निंदा की और थाना प्रभारी से बात की। साथ ही इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि छोटे से बच्चे पर पुलिस केस कैसे दर्ज कर सकती है? इस पर थाना प्रभारी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि यह भूलवश हुआ है। बाल न्यायालय में मामला खत्म हो जाएगा।
प्रार्थी के पिता ने दी गलत जानकारी
बच्चा छह साल से बड़ा ही है लेकिन प्रार्थी के पिता ने गलत जानकारी पुलिस को दी। उन्होनें आरोपी बच्चे की उम्र 13-14 साल बताई। इसी आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। अब मामला बाल न्यायालय पहुंच जाएगा, वहीं खात्मा भी हो जाएगा।
डी. पी. लोहिया, थाना प्रभारी, ब्यावरा
Updated on:
27 Jun 2019 06:56 pm
Published on:
27 Jun 2019 06:31 pm
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