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पिता के बिना नहीं रह पाती तीन साल की बेटी, वीडियो कॉल पर ही समझा रहे, राजगढ़ में खुद को अलग रख कर रहे ड्यूटी

कोरोना कर्मवीर चक्र अभियान : हमारे लिए डटे योद्धाओं को सलामजिला अस्पताल में लगी डॉक्टर्स की टीम कदम-कदम पर फेस कर रही चुनौती, फिर भी कायम है जज्बा

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कोरोना कर्मवीर चक्र अभियान : हमारे लिए डटे योद्धाओं को सलाम,कोरोना कर्मवीर चक्र अभियान : हमारे लिए डटे योद्धाओं को सलाम

ब्यावरा.कोरोना से फाइट करने तैयार है जिला अस्पताल की टीम।,ब्यावरा.कोरोना से फाइट करने तैयार है जिला अस्पताल की टीम।

ब्यावरा.कोविड-19 कोरोना वायरस पेंडम के बढ़ते केसेस से आप और हम भले ही भयभीत हैं लेकिन एक वर्ग ऐसा है जो दिन-रात इससे लड़ रहा है। तमाम चुनौतियों के बीच अपना ड्यूटी धर्म निभा रहा है। इन कर्मवीरों, जाबांंजों को हम सलाम करते हैं, जब भी मौका मिले आप इनका सम्मान जरूर कीजिए। दरअसल, पत्रिका कर्मवीर अभियान के माध्यम से हम ऐसे कर्मवीरों को नमन करते हैं। इनके जज्बे को हमारा सलाम है। ऐसे तमाम कर्मवीर डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी व अन्य वर्कर्स, सभी कोरोना से जंग लडऩे में लगे हुए हैं।
पिता के बिना नहीं रह सकती तीन साल की बेटी, फिर भी सेवा में डटे डॉक्टर
फोटो-बीआर१३०४-३११-ब्यावरा.अपनी बेटी के साथ डॉ. महेंद्र।
कोविड-19 अभियान के जिला अधिकारी डॉ. महेंद्र पाल सिंह करीब महीनेभर से खुद को आइसोलेट करके रखे हैं। उनकी तीन साल की बेटी आर्या है जो कि पिता के बिना एक मिनट नहीं रह पाती लेकिन ड्यूटी का जज्बा कायम है। वे बिटिया से वीडियो कॉल कर उसे संतुष्ट कर देते हैं और यहां हर दिन आने वाले चैलेंजेस फेस कर रहे हैं। हर दिन उन्हें तमाम केसेस की मॉनीटरिंग करना है। प्रोटोकॉल के हिसाब से न सिर्फ जांचें भोपाल भेजना है बल्कि नये केसेस को भी ट्रेस करवाना होता है। कोविड-19 की पूरी जिम्मेदारी टीम वर्क से निभा रहे डॉ. महेंद्र बताते हैं कि अभी हमें इस गंभीर स्थति को फेस करना है, यही हमारा ड्यूटी और मानव धर्म भी है। उनके माता-पिता पैतृक गांव माचलपुर से लगे धानोदा में रहते हैं। माताजी डाइबिटिक हैं लेकिन महीनेभर से उनसे मिल नहीं पा रहे। उनके भाई भोपाल में एमपी पुलिस में कार्यरत हैं।

बेटी इंदौर में फाइट कर रही, पिता राजगढ़ में दे रहे सेवा
(फोटो-बीआर१३०४-३०९)
जिला अस्पताल में पदस्थ सीनियर सर्जन डॉ. आर. एस. परिहार इमरजेंसी ड्यूटी के साथ ही क्वाइरेंटाइन और आइसोलेशन वार्ड संभाल रहे हैं। इसके अलावा कोविड-19 वार्ड की रोजाना मॉनीटरिंग करते हैं। उनकी डॉक्टर बेटी इंदौर में कोरोना से फाइट कर रही हैं और वे खुद राजगढ़ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वहीं, बेटा नोएडा में जॉब करता है, वहीं पर फंसा है। बावजूद इसके डॉ. परिहार का जज्बा कम नहीं होता। वे बताते हैं कि इस वक्त देश को हमारी जरूरत है, यही ड्यूटी धर्म निभाने का अवसर है। ऐसे मौके पर ही जनता को हमारी ज्यादा जरूरत होती है।
पति बैतूल, माता-पिता भी दूर, यहां अकेले रहकर फेस कर रहीं चुनौती
आइसोलेशन वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रहीं सीनियर नर्स दीपा परिहार भी अकेले रहकर कोरोना से फाइट कर रही हैं। उनके पति और पांच साल का बेटा उनसे दूर बैतूल रहते हैं। उनके पति पिछले दिनों ही बीमार हो गए थे, हार्ट प्रॉब्लम की वजह से उन्हें भोपाल लाना पड़ा था लेकिन उपचार के बाद उन्होंने दोनों को बैतूल ही भेज दिया। उनका कहना है कि मैं दिन-रात ड्यूटी में लगी हुईं, ऐसे में बच्चे और उसके पिता को घर में रखना रिस्की हो सकता था।

इसीलिए उन्हें बैतूल भेज दिया, माता-पिता और सास-ससुर भी दूर हैं लेकिन जज्बा कम नहीं होता। दीपा बतातीं है कि यहां आइसोलेशन में करीब 70 लोग भर्ती हैं लेकिन इन्हें मैनेज कर पाना भी बड़ी चुनौती साबित हो रही है। लोग समझने को तैयार नहीं होते, कोई इधर-उधर भागता है तो कोई सुनता ही नहीं, यह चुनौती हर दिन बनती है।
२४ घंटे एक कॉल में तैयार हैं जिले के एक मात्र एमडी मेडिसीन
कोविड-19 महामारी के दौर में सबसे व्यस्त शेड्यूल जिले के एक मात्र एमडी मेडिसीन डॉ. सुधीर कलावत का है। न सिर्फ वे रूटीन ड्यूटी कर रहे हैं बल्कि हर दिन तमाम प्रकार की इमरजेंसी को भी हैंडल कर रहे हैं। उनके सहयोगी डॉक्टर्स बताते हैं कि तमाम प्रकार कोरोना के सस्पेक्टेड पेशेंट्स की हिस्ट्री से लेकर उक्त पेशेंट की जानकारी डॉ. कलावत ही हैंडल करते हैं। तमाम प्रकार की रिस्क के बीच पूरे अस्पताल में ड्यूटी करते हैं। यहां तक कि रूटीन चेकअप और आम मरीजों को भी वे ही देख रहे हैं। आधी रात को भी यदि कोई इमरजेंसी आती है तो वे तत्काल पहुंचते हैं और हर केस को जज्बे के साथ संभाल रहे हैं। बता दें कि हाल ही में उन्हें इंदौर अटैच करने के निर्देश राज्य शासन द्वारा मिले हैं लेकिन यह बड़ी दिक्कत जिले के लिए साबित हो सकती है। यदि वे ही न रहे तो इमरजेंसी केसेस को हैंडल कर पाना मुश्किल होगा।