
water crisis rajasthan well supplying water to mp village
राजेश विश्वकर्मा
water crisis rajasthan well : कागजी दावों और एसी कमरों की बैठकों में शत प्रतिशत पेयजल आपूर्ति का दम भरने वाले जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है। जिला मुख्यालय से महज 39 किलोमीटर दूर खिलचीपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत बावड़ीखेड़ा के फतेहपुर गांव से जो तस्वीरें सामने आई हैं वो विकास के दावों को ठेंगा दिखा रही हैं। ये गांव आज भी विकास के मामले में 40 साल पीछे नजर आ रहा है। इस गांव में दो साल पहले जल जीवन मिशन की लाइन तो बिछ गई लेकिन नल में जल आज तक नहीं आया है।
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25 घरों वाले इस गांव के 200 लोगों की प्यास राजस्थान के झालावाड़ जिले का बांकड़ गांव का कुआं बुझा रहा है। यानी पूरी तरह से लोग उसी पर निर्भर हैं। यानी मप्र के लोगों को मोहनपुरा-कुंडालिया जैसी बड़ी परियोजनाएं, जल जीवन मिशन, पंचायत विभाग के टैंकर, पीएचई के हैंडपम्प और टंकियां पानी मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं। राजस्थान सीमा का एक कुआं उनकी प्यास बुझा रहा और जब पत्रिका की टीम इस गांव में रियलिटी चेक करने के लिए पहुंची तो पूरी हकीकत सामने आई। राजस्थान बॉर्डर पर बना बिना मुंडेर का कुआं ही गांव के लोगों की प्यास बुझा रहा है।
गांव के लोगों ने बताया कि गांव में अन्य कुएं भी हैं लेकिन उनका पानी पीने योग्य नहीं हैं। न कोई ट्यूबवेल पंचायत ने लगाने की जहमत उठाई न ही सरपंच, सचिव ने टैंकर डलवाने का प्रबंध किया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले के सरपंच गांव के कुओं में टैंकर डलवा दिया करते थे, लेकिन अब कोई झांकने तकन हीं आता। पूरा गांव पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है, राजस्थान के कुएं से महिलाएं आज भी सिर पर बर्तन रखकर पानी लाती हैं, साथ ही गांव के लोग बैलगाड़ी से पानी लेकर आते हैं।
एसी के बंद कॉन्फ्रेंस हॉल में होने वाली बैठकों में शत प्रतिशत जल सप्लाई के दावे करने वाले जल जीवन मिशन के अफसरों की पोल यहां खुल गई है। यानी जिलेभर में जहां-जहां भी सप्लाई के दावे किए जा रहे हैं वे कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। जिन गांवों में 100 प्रतिशत सप्लाई की बात की जा रही है वहां पानी नहीं पहुंच पा रहा। विभाग का तर्क है कि पंचायतें ऑपरेटर नहीं दे रहीं, इसलिए दिक्कत आ रही है। लेकिन असल में जमीनी काम हुआ ही नहीं है।
फतेहपुर के गांव वालों ने बताया कि हमारी पंचायत बावड़ीखेड़ा में कुमारा, लेवड़ापुरा सहित अन्य गांव आते हैं। यहां सौंधिया समाज का सरपंच है और यह एक मात्र गांव गुर्जर समाज का है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारे गांव को जानबूझकर सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। न यहां सड़क है न ही स्कूल में बच्चों के लिए सुविधाएं। सड़क के नजदीक का गांव होने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पहले के सरपंच ने टैंकर का प्रबंध कर कुओं में डलवाया था लेकिन इस बार किसी ने नहीं डलवाया।
खिलचीपुर और राजगढ़ दो विस और ब्लॉक का हिस्सा होने के बावजूद यह गांव सुविधाओं से वंचित है। गांव राजगढ़ विधानसभा में आता है और शासकीय स्तर पर खिलचीपुर ब्लॉक में आता है। बावजूद इसके लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। ग्रामीणो का कहना है कि आखिरी छोर का गांव होने से यहां प्रशासनिक अधिकारी भी यदा-कदा ही आते हैं। नेता भी सिर्फ चुनाव के दौरान ही पहुंचते हैं।
Published on:
24 May 2026 08:17 pm
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