1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आजादी के 73 सालों बाद रेंगाकठेरा को नसीब हो पाएगा पुल, ग्रामीणों सहित छात्रों को अब नदी पार नही करना पड़ेगा

पांच साल पहले पत्रिका ने उठाया था मुद्दा अब मिली स्वीकृति, बारिश में टापू बनने वाले गांव के लिए बजट में मिला रपटा स्टापडेम

2 min read
Google source verification
After 73 years of independence, Rengakathera will be able to pull the bridge, students including villagers will no longer have to cross the river

पांच साल पहले पत्रिका ने उठाया था मुद्दा अब मिली स्वीकृति, बारिश में टापू बनने वाले गांव के लिए बजट में मिला रपटा स्टापडेम

राजनांदगांव / खैरागढ़. ब्लाक के वनाचंल क्षेत्र चंगुर्दा पंचायत के आश्रित ग्राम रेंगाकठेरा के ग्रामीणों को आजादी के 73 साल बाद गांव से आवागमन के लिए पुल की सौगात मिलेगी। रेंगाकठेरा के ग्रामीणों को इतने वर्षो बाद भी पंचायत सहित ब्लाक मुख्यालय आनें कुकरापाठ नदी को पार करना पड़ता था। ग्रामीणों के साथ साथ स्कूली बच्चों को भी पढ़ाई सहित अन्य कार्यो के लिए नदी पार करना मजबूरी बन गई थी। सालों से हो रही पुल पुलिया स्टाप डेम रपटा की मांग केवल कागजों में भी दौड़ रही थी। छग सरकार ने हाल ही के बजट में कुकरापाठ नदी पर स्टापडेम कम रपटा निर्माण कम काजवे के लिए साढ़े तीन करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। कार्य की प्रांरभिक शुरूआत के लिए जल संसाधन विभाग को 30 लाख रूपए की स्वीकृति भी दी गई है। रपटा निर्माण के बाद रेंगाकठेरा पूरी तरह बिना बाधा के पंचायत और ब्लाक मुख्यालय से जुड़ पाएगा।

बारिश में बन जाता है टापू
चंगुर्दा पंचायत के आश्रित ग्राम रेंगाकठेरा के रहवासियों को बारिश के दौरान कठनाईयों का सामना करना पड़ता है। कुकुरापाठ नदी में बारिश के दौरान वनक्षेत्रों में बारिश के बाद उफान आता है जिसके कारण यहां रहने वाले 70 परिवारों के 3 सौ से अधिक लोगों को टापू बने गांव में रहना पड़ता है। नदी पार करने के अलावा गांव के आवागमन के लिए कोई व्यवस्था नही है। गांव में प्राथमिक शाला के बाद माध्यमिक शाला की पढ़ाई के लिए दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को नदी पार कर बैगाटोला स्कूल आना पड़ता है। बारिश के दिनों में छात्र-छात्राएं अतिरिक्त कपड़े लेकर नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं। गांव में पंचायत द्वारा हर सुविधा उपलब्ध है लेकिन पुल के अभाव के कारण गांव सीधे तौर पर जुड़ नही पाया था। पुल की मांग को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों ने कई बार नेताओं का दरवाजा खटखटाया लेकिन उम्मीद पूरी नही हो पाई। तत्कालीन सरपंच रहे महेश मंडावी ने भी इस मामले को स्थानीय सहित प्रदेश के नेताओं तक पहुंचाया। ग्रामीण अपने खर्चे से मंत्री और मुख्यमंत्री तक मांग लेकर गए थे।

विक्रांत ने की थी पहल
रेंगाकठेरा के लिए पुल अथवा स्टापडेम निर्माण कराने पांच वर्ष पूर्व तत्कालीन जनपद अध्यक्ष और फिलहाल जिपं उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने इस समस्या का हल निकालने प्रयास किया था। जल संसाधन सहित प्रधानमंत्री सड़क योजना से रेंगाकठेरा को जोडऩे सड़क सहित पुल रपटा निर्माण की मांग को पूरा करने शासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। शासन स्तर से इसकी कार्यवाही शुरू करते रपटा निर्माण के लिए जल संसाधन विभाग को इसका स्टीमेट तैयार करने जैसे निर्देश भी दिए गए लेकिन कागजी कार्रवाई में ही चार साल निकल गए।

अब बजट में मिली स्वीकृति, जल्द होगा निर्माण
पांच साल पहले रेंगाकठेरा की इस समस्या को पत्रिका ने सबसे पहले उठाया था। मामले को जनमुद्दा बताते इसके निर्माण और स्वीकृति के लिए लगातार खबरों का प्रकाशन किया गया। जिसके बाद इसके लिए जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई शुरू की थी। इस साल आए सरकार के बजट में जलसंसाधन को मिले कई कार्यो की स्वीकृति में रेंगाकठेरा को मुख्य मार्ग से जोडऩे साढ़े तीन करोड़ रूपए की रपटा कम काजवे निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए जल्द ही कार्रवाई भी शुरू होगी ताकि ग्रामीणों को इसका जल्दी लाभ मिल सके।

रपटा निर्माण के लिए मिली स्वीकृति
उपअभियंता जलसंसाधन विभाग खैरागढ़, जेके जैन ने कहा कि शासन के बजट में रेंगाकठेरा में रपटा कम काजवे निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई है। कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।