
गर्मी में ‘ठंडक’ के नाम पर जहर (photo source- Patrika)
Chemical Drinks Health Risk: गर्मी बढ़ते ही शहर में ठंडे पेय पदार्थों की मांग तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ भी बढ़ गया है। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे कई शीतल पेय, आइसक्रीम और रंग-बिरंगे ड्रिंक्स में केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वहीं गन्ना रस और अन्य पेय बेचने वाले कई स्ट्रीट वेंडर साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
दूसरी ओर, शहर के आउटर इलाकों में बिना पंजीयन के पानी की बॉटलिंग यूनिट्स संचालित हो रही हैं। यहां साधारण पानी को ‘मिनरल वाटर’ बताकर बोतलों में भरकर सीधे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में सप्लाई किया जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमों की अनदेखी करते हुए बिना लाइसेंस यह कारोबार तेजी से फैल रहा है। न पानी की गुणवत्ता की जांच हो रही है और न ही पैकेजिंग मानकों का पालन, जिससे लोग अनजाने में असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं।
खाद्य विभाग की टीम नियमित रूप से जांच कर रही है। सैंपल लेने का काम भी किया जा रहा है। सैंपल में गड़बड़ी मिलने पर निश्चित रूप से न्यायालय के माध्यम से कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माने से लेकर कारावास तक का प्रावधान होता है- तरुण बिरला, खाद्य विभाग
जिले का अधिकतक तापमान इन दिनों 44 डिग्री पर है। मौसम विभाग की माने तो दो दिनों तक तापमान ऐसे ही बना रहेगा। 20 अप्रैल के बाद तापमान में हल्की नर्मी आने की संभावना है। भीषण गर्मी के चलते जन-जीवन प्रभावित है। स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र प्रसाद ने बताया कि केमिकलयुक्त पेय पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी रोग, फूड पॉइजनिंग, लीवर व किडनी पर असर, एलर्जी और इम्यून सिस्टम कमजोर होने का खतरा रहता है। वहीं दूषित या नकली मिनरल वाटर से टायफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहकर केवल प्रमाणित और स्वच्छ पेय पदार्थों का ही सेवन करने की सलाह दी है।
खाद्य विभाग की सक्रियता कमजोर होने का फायदा ऐसे धंधे में लिप्त कारोबारी बखूबी उठा रहे हैं। जांच के दौरान पिछली बार तुमड़ीबोड़ में पानी पाऊच फैक्ट्री में गड़बड़ी सामने आई थी। साल्हेवारा क्षेत्र में इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद फैक्ट्री को सील किया गया था। वहीं जार में बेचे जाने वाले पानी की जांच को लेकर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वह पैक्ड की श्रेणी में नहीं आता, तो उसकी गुणवत्ता की जांच वे नहीं करेंगे।
Updated on:
19 Apr 2026 04:26 pm
Published on:
19 Apr 2026 04:25 pm
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