ज्ञानेश्वरी की खेल यात्रा सातवीं कक्षा से शुरू हुई, जब उन्होंने पहली बार बारबेल उठाया। शुरुआती दिनों से ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देना शुरू कर दिया था। स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता मिलने के बाद उन्होंने लगातार स्कूल नेशनल, ओपन नेशनल और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। उनके प्रदर्शन में निरंतर सुधार और कठिन परिश्रम का ही परिणाम है कि आज वह भारतीय टीम की जर्सी पहनने जा रही हैं।