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CG Election 2023 : चुनावी समर में अलग-अलग सेक्टर में रोजगार के अवसर

CG Assembly Election 2023 : विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। प्रत्याशी मैदान में हैं।

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चुनावी समर में अलग-अलग सेक्टर में रोजगार के अवसर

चुनावी समर में अलग-अलग सेक्टर में रोजगार के अवसर

राजनांदगांव। CG Assembly Election 2023 : विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। प्रत्याशी मैदान में हैं। रोजाना जनसंपर्क के लिए गांव-गांव जाकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं। इस चुनावी समर में विभिन्न लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। जैसे चुनाव के समय बैनर-पोस्टर और फ्लैक्स की छपाई के लिए प्रिंटिंग प्रेस वालों के पास लाइन लगी हुई है।

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ई-रिक्शा वाले भी रिकार्डिंग के माध्यम से प्रचार-प्रसार के लिए घूम रहे हैं। इधर गांवों में दीवार लेखन के लिए पेंटरों की मांग बढ़ गई है, तो वहीं पार्टी सिंबाल का झंडा बनाने दर्जी लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा चुनावी प्रचार के लिए लग्जरी व मालवाहक गाडिय़ों को भी हायर किया गया है। यही कारण है कि इन कारोबार से जुड़े लोगों को वर्तमान समय में आसानी से रोजगार उपलब्ध हो रहा है।


राष्ट्रीय पार्टियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित नाटक, प्रहसन और नाचा-गम्मत की प्रस्तुति देने वाली मंडलियों से भी संपर्क साध रहे हैं। सभी मंडलियों के पहले ही बुक कराया जा चुका है। मंडली द्वारा नाटक प्रहसन के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। वहीं ऐसे कार्यक्रमों को देखने के लिए गांव में भीड़ भी आसानी से जुट रही है, उस बीच प्रत्याशी या पार्टी पदाधिकारी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वहां उपस्थित लोगों को संबोधित कर अपने पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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ऐप और वेब पोर्टल में भी मारामारी

बड़े राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के लिए ऐप और वेब पोर्टल का भी सहारा ले रहे हैं, ऐसे में इन सोशल मीडिया में प्रचार के लिए सामग्री तैयार करने के लिए कंप्यूटर के जानकार युवाओं को भी हायर किया गया है। ये युवा सोशल मीडिया में चुनाव प्रचार का जिम्मा उठाए हुए हैं। सभी क्षेत्र के लिए पार्टी में अलग-अलग पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यू-ट्यूब चैनल वालों से भी कर रहे संपर्क

राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले कलाकारों से भी संपर्क कर रहे हैं। उन्हें भी चैनल के माध्यम से अपने पक्ष में प्रचार-प्रसार के लिए अच्छा-खासा पैकेज में हायर किया जा रहा है। क्योंकि छोटे-छोटे यू-ट्यूब चैनलों में 5 से दस हजार सब्सक्राइबर मिल जाते हैं। बड़े चैनलों के सब्सक्राइबर तो लाखों में होते हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार के लिए इसे भी बढिय़ा जरिया माना जा रहा है।


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