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डोंरगगढ़ ब्लाक के हीरापुर स्कूल के बच्चों को बनाया ‘हीरा’, अब खेलकूद के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है …

डेढ़ साल पहले जागरुकता की अलख जगाने शिक्षकों ने थामी 'मशाल'

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Heera, made to the children of Hirapur School in Dongargarh block, now tops in sports with sports too ...

डोंरगगढ़ ब्लाक के हीरापुर स्कूल के बच्चों को बनाया 'हीरा', अब खेलकूद के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है ...

राजनांदगांव. डोंगरगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत मक्काटोला के आश्रित ग्राम हीरापुर आर्थिक एवं सामाजिक संरचना कमजोर होने के बावजूद यहां के शिक्षक-पालक, संरपंच व अधिकारियों की मेहनत से प्राथमिक शाला के बच्चों की शिक्षा व स्कूल की साफ-सफाई स्कूल के प्रति रूचि देखते ही बनती है।

ग्राम का अधिकांश सामुदाय श्रमिक है। यहां के लोग मजदूरी के लिए अन्यत्र स्थान भी जाते हैं। इस वजह से बच्चे नियमित उपस्थित नहीं हो पाते थे। इन चुनौतियों से निपटनेे के लिए विद्यालय स्तर पर शिक्षक व अन्य स्टाफ सदस्यों ने योजना बनाकर कार्य किया। पहले ऐसे बालक-बालिकाओं का चिन्हाकन किया गया, जो अनियमित हैं। घर-घर जाकर सम्पर्क किया। शिक्षा का महत्व बताया। पालकों से सतत सम्पर्क किया गया। गतिविधियों एवं अन्य नवाचार के परिणाम चुनौतियों के परिपेक्ष्य में योजनागत रूप से छात्र, शिक्षक, सामुदाय की सहभागिता से किए गए प्रयासों से समाज में परिवर्तन की झलक दिखाई देेने लगी।

पौधरोपण को बनाई आदत

पालक शिक्षा के प्रति जागरूक हुए तथा अपने बच्चोंको नियमित शाला भेजने लगे। पालक स्वयं शाला में आकर अपने बच्चों की प्रगति पर चर्चा करने लगे, जो बच्चे जागरूता के अभाव में गंदे रहते थे एवं स्कूल ड्रेस में नहीं आते थे। वे अब स्वच्छ स्थान कर शाला आने लगे। विद्यालय के छात्रों ने पर्यावरण के महत्व को जाना व विद्यालय तथा ग्राम में पौधरोपण को अपनी आदत बना लिया।

परिसर में कीचन गार्डन विकसित

डोंगरगढ़ ब्लाक के ग्राम पंचायत मक्काटोला के आश्रित ग्राम हिरापुर का छोआ सा प्राथमिक शाला माडल से कम नहीं है। यहां 30 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्कूल का संचालन 2 शिक्षक जयप्रकाश सिन्हा व अहिल्या यादव द्वारा किया जा रहा है। शिक्षकों की मेहनत से आज यहां के बच्चे पाठयक्रम के अलावा सामान्यज्ञान की जानकारी भी रखते हंै। वर्णमाला के साथ-साथ अंग्रेजी ग्रामर की समझ है जोडऩा, घटाना, गुणा, भाग के अलावा पहाड़ा भी याद है। स्कूल में नवाचार के तहत स्मार्ट शिक्षा दी जाती है। अंग्रेजी व जनरल नॉलेज तथा गणित में छात्र-छात्राओं ने महारत हासिल की। यहां के बच्चे शिक्षक पालक के सतत मेहनत से फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हंै। स्कूल में शासन के निर्देशानुसार किचन गार्डन भी विकसित किया गया।

पढ़ाई के साथ खेलकूद में अव्वल

पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे खेल कूद मे भी अव्वल है। संकुल ब्लाक और जिला स्तरीय खेल कूद प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं। चित्रकारी में भी बच्चे प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। यहां बीच-बीच में डाइट, ब्लाक, राज्य स्तर के अधिकारी स्कूल का अवलोकन कर चुके हंै। स्कूल का बाहरी वातावरण में वाल पेंट किया गया है। स्कूल में घुसते ही पेड़ पौधों से सुसज्जित एवं डिजिटल शौचालय स्कूल का मुख्य भाग बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।

शिक्षादूत सम्मान से नवाजे गए

स्कूल के अंदर दिवालों पर पेंटिग के द्वारा बच्चों को सिखने योग्य बातें लिखी हुई है। उपलब्धि इसी वर्ष यहां के शिक्षक जयप्रकाश सिन्हा को शिक्षादूत से नवाजा गया। तथा संकुल व पंचायत स्तर में भी कई बार सम्मान किया जा चुका है। यहां के संरपच एवं ग्राम के पालक का सहयोग अद्वितीय है।

ऐसे ही काम करने चाहिए

जिला शिक्षा अधिकारी हेमंत उपाध्याय ने कहा कि शिक्षकों में समर्पण का भाव व जूनन हो, तो ऐसे ही परिणाम मिलते हैं। छोटे से इस स्कूल से अन्य सरकारी स्कूलों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। शिक्षक यदि बच्चों को भगवान का रूप मानते हैं, तो ऐसे ही काम करने चाहिए।