
अस्पताल को धोखे में रख नाबालिग बेटी का मां-बाप ने पहले कराया प्रसव, फिर बेच दिया नवजात को
राजनांदगांव. राजधानी रायपुर में राजनांदगांव की एक नाबालिग युवती के बच्चे को बेचे जाने के मामले में यहां एक नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि करीब साल भर पहले इस नाबालिग का यहां के सरकारी अस्पताल में एक और प्रसव हुआ था और उस समय उसके माता-पिता ने अस्पताल को धोखे में रखकर अपनी बेटी को दूसरे नाम से अस्पताल में भर्ती कराया था।
बच्चा बेचते हुए पुलिस ने पकड़ा
प्रसव के बाद पैदा हुए नवजात को उस महिला को सौंप दिया था। अब इस खुलासे के बाद बाल कल्याण समिति ने मामले में कार्रवाई करते हुए करीब एक साल के बच्चे को दत्तक ग्रहण एजेंसी के सुपुर्द कर दिया है और मामले में एफआईआर के लिए पुलिस को पत्र लिखा है। उल्लेखनीय है कि रायपुर में करीब पखवाड़े भर पहले टिकरापारा के एक निजी अस्पताल में पुलिस ने एक नर्स को डेढ़ लाख रूपए में बच्चा बेचते हुए पकड़ा था।
चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज किया
इस मामले में पुलिस ने अस्पताल की चिकित्सक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि अस्पताल में राजनांदगांव की जिस बच्चे को जन्म दिया था, उसके साथ एक युवक ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया था। गर्भवती होने के बाद उसके परिजन लोक लाज के डर से उसे रायपुर ले गए। टिकरापारा के एक अस्पताल में लड़की ने बच्ची को जन्म दिया। लड़की और उसके परिजन बच्चे को नहीं रखना चाहते थे।
बाल कल्याण समिति द्वारा पुलिस को लिखे पत्र के अनुसार शहर के गौरीनगर निवासी एक दम्पत्ति ने १० अक्टूबर २०१७ को अपनी साढ़े १६ साल की नाबालिग बेटी को जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए भर्ती किया था। उन्होंने भर्ती करने के दौरान अपनी बेटी का नाम न लिखाकर डोंगरगढ़ की अर्चना टेंभुरकर का नाम लिखाया था। इस नाबालिग युवती ने अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया, जिसे उसके माता-पिता ने अर्चना टेंभुरकर को सौंप दिया।
जेजे एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज
इसके बाद से शुक्रवार 28 सितम्बर 2018 तक यह बच्ची इसी महिला के पास रह रही थी। समिति ने इस मामले में दत्तक ग्रहण विनिमय के प्रावधानों के विपरीत दत्तक दिए जाने का मामला मानते हुए पुलिस को पत्र लिखकर किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) की धारा ८० व ८१ के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना किए जाने पत्र लिखा है। पुलिस ने इस मामले में नाबालिग युवती से पूछताछ की तो उसके और युवक का मामला खुला।
युवती से बयान के आधार पर पुलिस ने इस मामले में आरोपी युवक को राजनांदगांव से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। फिलहाल यह युवक रायपुर में जेल में है। इस युवक से पूछताछ में एक नया मामला खुला जिसके आधार पर अब यहां नाबालिग लड़की के माता-पिता और उसके साल भर पहले जन्मे बच्चे को पालने वाली महिला के खिलाफ एफआईआर के लिए लिखा गया है। जानकारी के अनुसार नियमों के विपरीत दत्तक देकर रखी गई करीब एक साल की बच्ची को इस महिला से लेकर दत्तक ग्रहण एजेंसी में भेज दिया गया है। अब इस बच्ची को लेकर नियम और प्रक्रिया के तहत फैसला लिया जाएगा।
बच्चा गोद लेने की यह है पूरी प्रक्रिया
दत्तक दिए जाने के लिए नियमों में अब काफी बदलाव आ गया है। दत्तक लेने के लिए अब सरकारी वेबसाइट में कारा (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी) यानि केद्रीय दत्तक संसाधन संस्था के नियमों के तहत विज्ञापन जारी किया जाता है। इसमें आवेदक को लड़का या लड़की गोद लेने की इच्छा के साथ अपना पूरा व्यक्तिगत विवरण, पुलिस वेरिफिकेशन, सम्पत्ति का विवरण, स्वस्थ्य होने का प्रमाण-पत्र, बच्चा न होने का प्रमाण-पत्र भेजना होता है।
आवेदन में दी गई जानकारी का सत्यापन किए जाने के बाद आवेदन को तीन बच्चों की तस्वीर दिखाई जाती है। इनमें से उसे एक को चुनना होता है।किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार गलत तरीके से गोद लेने और इस कार्य में मदद करने वालों को तीन साल के कैद और एक लाख रूपए के जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी चंद्रकिशोर लाड़े ने बताया कि इस मामले में किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन हुआ है। दोषियों पर कार्रवाई के लिए पुलिस को लिखा गया है। साथ ही एक साल की बच्ची को दत्तक ग्रहण एजेंसी के संरक्षण में दिया गया है। टीआई वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि गलत तरीके से दत्तक दिए जाने को लेकर एफआईआर के लिए बाल कल्याण समिति से पत्र मिला है। इस मामले में प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की जाएगी।
Published on:
30 Sept 2018 11:39 am
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