
राजनांदगांव. आदिवासी बाहुल्य मानपुर क्षेत्र के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में रूढ़ीप्रथा ग्राम सभा का गठन कर अनुसूचित क्षेत्रों में शासन और प्रशासन के दखल को नकारने के आदिवासियों के फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कम्प की स्थिति है। पुलिस प्रशासन ने तत्कालिक तौर पर तो गांवों में लगाए गए इस तरह के बोर्ड हटा दिए हैं लेकिन ग्रामीणों के अगले कदम को लेकर प्रशासन में बेचैनी की स्थिति है।
राजनांदगांव के मानपुर ब्लाक के बसेली, खुर्सेकला, खुर्सेखुर्द, कारेकट्टा, मदनवाड़ा, हुरवे, हुरैली, दोरदे, मूचर जैसे गांवों के ग्रामीणों ने आपस में बैठक कर एक रूढ़ीवादी ग्राम सभा का गठन किया और इस ग्राम सभा के जरिए अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू की।
इस ग्राम सभा का मानना है कि मानपुर और मोहला आदिवासी क्षेत्र है और राज्य की सरकार आदिवासी नहीं है, ऐसे में सरकार का इस क्षेत्र की जमीन पर कोई हक नहीं है और न ही वह इसे लेकर कोई फैसला ले सकती है।
भीतर ही भीतर होता रहा काम
आदिवासियों ने साल भर पहले किया था। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर १४ अप्रैल २०१७ को इसका गठन करने के एक साल बाद १४ अप्रैल २०१८ को आदिवासियों ने इसे जमीन पर उतारा। पूरे एक साल की मेहनत के बाद गांव गांव में इस तरह के बोर्ड लगाए कि प्रशासन सकते में आ गया।
दिखाई गई सख्ती
पुलिस बल ने गांवों से बोर्ड हटाने का काम किया और आदिवासियों के एक नेता सुरजुराम टेकाम को गिरफ्तार भी किया। हालांकि पुलिस इस गिरफ्तारी को पुराने मामले में होना बता रही है लेकिन आदिवासियों का मानना है कि उनकी रूढ़ीप्रथा ग्राम सभा को कमजोर करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
अगले कदम का इंतजार
पुलिस की सख्ती के बाद भी आदिवासियों ने अपनी परंपरा को कायम रखने की बात की है। ऐसे में अब प्रशासन का पूरा ध्यान इस ओर है कि आदिवासी अगला कदम क्या उठाते हैं। इस बीच मानपुर में एक बड़े आंदोलन होने की भी चर्चा है लेकिन इसे लेकर अभी कुछ भी साफ नहीं है।
Published on:
08 May 2018 03:47 pm
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